मुंबई हो रहे फिनटेक फेस्ट में भारतीय प्रतिभूति और बोर्ड ( सेबी ) की चेयरपर्सन माधवी पुरी बुच ने बताया कि सेबी ने एक्सचेंजों और डिपॉजिटरीज के लिए मानक एप्लिकेशन प्रोग्रामिंग इंटरफेस (एपीआई) पर काम करना शुरू कर दिया है। उन्होंने छोटे और लघु आकार के रियल स्टेट निवेशक ट्रस्ट यानी आरईआईटी के बारे में सकारात्मकता दर्शाते हुए कहा कि अब कारोबारी इकाइयां ऐसी यूनिट्स पर नियमन के लिए आगे आ रही हैं। इससे कारोबार करने में आसानी तो होगी साथ परेशानियां भी कम होगी। उन्होंने कहा कि हाल ही में बाजार नियामक सेबी ने छोटे और मझोले रियल एस्टेट निवेश ट्रस्ट के लिए विनियमन लागू किया जिसका उदेश्य रियल एस्टेट क्षेत्र में निवेशकों की रुचि को बढ़ाना है।
नियमन के लिए आगे आए छोटे मझोले रियल स्टेट निवेशक
उन्होंने फिनटेक फेस्ट 2024 में बोलते हुआ कहा कि अनुपालन और नियामक की भूमिका काफी बड़ी होती है। पिछले कुछ समय में उद्योग जगत के लोग छोटे व मझोले आरईआईटी पर विनियमन के लिए आगे आए हैं। हालांकि, बाजार नियामक ने कहा कि सेबी (आरईआईटी) विनियमन 2014 में समय-समय पर संशोधन किया गया है। उन्होंने कहा कि सेबी का उद्देश्य एक ऐसा परिदृश्य बनाने का है, जहां बाजार के सहभागियों में सहजता का माहौल बने और आसानी से कारोबार किया जा सके। वायदा और विकल्प यानी एफएंडओ के व्यापार पर विनियमन पर सेबी के चर्चा पत्र पर बुच ने बताया कि प्रस्तावों पर हितधारकों की ओर से 6,000 सुझाव मिले हैं।
फिनटेक कंपनियों के लिए अवसर
उन्होंने फिनटेक कंपनियों के लिए भविष्य में अवसरों को लेकर कहा कि जिस प्रकार से प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल बढ़ा है, उसे देखते हुए फिनटेक कंपनियों के पास अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने बताया कि हाल ही में सेबी ने एफएंडओ सेगमेंट के लिए परामर्श पत्र जारी किया जिसके लिए सेबी के पास 6,000 लोगों के सुझाव आए। प्रौद्योगिकी ने इतनी बड़ी मात्रा में फीडबैक का तेजी से प्रसंस्करण को संभव बना दिया है। हमारा उद्देश्य प्रौद्योगिकी का उपयोग करके अनुपाल को आगे बढ़ाना है।
हिंडनबर्ग रिपोर्ट में लगे आरोपों पर बोलने से बचीं सेबी प्रमुख
हिंडेनबर्ग रिपोर्ट में बुच पर आरोप लगाए गए थे, जिसके बाद वह मुंबई में चल रहे ग्लोबल फिनटेक फेस्ट 2024 में पहली बार सार्वजनिक रूप से नजर आईं। उन्होंने सेबी के एपीआई प्रारूप के मानकीकरण पर काम करने को लेकर जानकारी दी, लेकिन हिंडनबर्ग पर किसी भी प्रकार के सवालों का जवाब देने से इनकार कर दिया। बता दें कि हिंडनबर्ग ने रिपोर्ट में कहा था कि बाजार नियामक सेबी की चेयरपर्सन माधबी पुरी बुच और उनके पति धबल बुच ने बरमूडा तथा मॉरीशस में अस्पष्ट विदेशी कोषों में अघोषित निवेश किया था। उसने कहा कि ये वही कोष हैं जिनका कथित तौर पर विनोद अदाणी ने पैसों की हेराफेरी करने तथा समूह की कंपनियों के शेयरों की कीमतें बढ़ाने के लिए इस्तेमाल किया था। विनोद अदाणी, अदाणी समूह के चेयरपर्सन गौतम अदाणी के बड़े भाई हैं।
वायदा व विकल्प कारोबार पर भी बोलीं सेबी प्रमुख
पूंजी बाजार नियामक (सेबी) को वायदा व विकल्प (एफएंडओ) कारोबार पर जारी परामर्श पत्र पर करीब 6,000 हितधारकों से सुझाव मिले हैं। भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) की चेयरपर्सन माधबी पुरी बुच ने गुरुवार को इसकी जानकारी दी। सेबी ने जुलाई में जारी अपने परामर्श पत्र में सात उपायों का प्रस्ताव दिया था। इनमें न्यूनतम अनुबंध आकार में वृद्धि व विकल्प प्रीमियम का अग्रिम संग्रह, स्थिति सीमाओं की ‘इंट्रा-डे’ निगरानी, ‘स्ट्राइक’ कीमतों का युक्तिकरण, अंतिम दिन (एक्सपायरी डे) पर ‘कैलेंडर स्प्रेड’ लाभ को हटाना और निकट अनुबंध समाप्ति मुनाफे में वृद्धि शामिल है। इन उपायों का उद्देश्य निवेशकों की सुरक्षा बढ़ाना तथा ‘डेरिवेटिव’ बाजारों में बाजार स्थिरता को बढ़ावा देना है। ‘ग्लोबल फिनटेक फेस्ट 2024’में बुच ने कहा कि नियामक को एफएंडओ खंड पर परामर्श पत्र पर करीब 6,000 हितधारकों से सुझाव मिले हैं। साथ ही प्रौद्योगिकी ने इतनी बड़ी संख्या में सुझावों पर गौर करना आसान बना दिया है।' इसके अलावा उन्होंने कहा कि सेबी कई दर्जन कृत्रिम मेधा (एआई) संचालित प्रौद्योगिकियों पर काम कर रहा है, जिनका मकसद एआई का इस्तेमाल कर निगरानी और प्रसंस्करण में सुधार करना है।
डेरिवेटिव को बैन करने का कोई इरादा नहीं
इस महीने की शुरुआत में सेबी के पूर्णकालिक सदस्य अनंत नारायण जी. ने कहा था कि ‘डेरिवेटिव’ कारोबार पर पाबंदियां लगाने के पीछे पूंजी बाजार नियामक का ‘‘ प्रथम उद्देश्य ’’ विकल्प कारोबार में ‘‘ अंतिम दिन होने वाली गहमागहमी को नियंत्रित करना है।’’उन्होंने स्पष्ट किया कि सेबी का ‘डेरिवेटिव’को प्रतिबंधित करने का कोई इरादा नहीं है। इससे पहले, सेबी प्रमुख ने बताया था कि समस्याग्रस्त वायदा व विकल्प खंड में परिवारों को प्रति वर्ष 60,000 करोड़ रुपये तक का नुकसान हो रहा है। वहीं सेबी के शोध में पता चला था कि खुदरा व्यापारी एफएंडओ खंड में 10 में से नौ कारोबार में नुकसान उठाते हैं। सरकार ने जुलाई में केंद्रीय बजट में ‘डेरिवेटिव’खंड में अत्यधिक सक्रिय रुचि के बारे में चिंताओं को दूर करने के लिए एक अक्टूबर से वायदा व विकल्प व्यापार दोनों पर प्रतिभूति लेनदेन कर (एसटीटी) बढ़ा दिया था।