देश में बैंकों के प्रदर्शन और कोरोना वायरस महामारी से प्रभावित हुई अर्थव्यवस्था को गति देने के मामले में हुई प्रगति की समीक्षा करने के लिए आज वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के प्रमुखों के साथ बैठक करेंगी। इसके साथ ही वित्त मंत्री आज एन्हांस्ड एक्सेस एंड सर्विस एक्सीलेंस यानी आसान बैंकिंग का चौथा चरण (ईज-4) भी लॉन्च करेंगी। ईज-4 सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के लिए एक कॉमन रिफॉर्म एजेंडा है। मालूम हो कि देश में पिछले साल मार्च 2020 में महामारी की शुरुआत होने के बाद से यह वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और सरकारी बैंकों के प्रमुखों की आमने-सामने की पहली समीक्षा बैठक है।
एन्हांस्ड एक्सेस एंड सर्विस एक्सीलेंस का पहला चरण जनवरी 2018 में लॉन्च किया गया था। इसके तहत ग्राहकों को कॉल सेंटर, वेब पोर्टल, मोबाइल एप और टच प्वाइंट्स के जरिए उनके दरवाजे तक बैंकिंग सेवाओं की सुविधा दी जाती है। एनहांस्ड एक्सेस एंड सर्विस एक्सीलेंस का मकसद क्लीन और स्मार्ट बैंकिंग को संस्थागत रूप देना है। इसके तहत छह थीम पर फोकस किया जाता है। इसमें जिम्मेदार बैंकिंग, क्रेडिट ऑफ टेक, उद्यमी मित्र, वित्तीय साक्षरता, डिजिटलाइजेशन और ब्रांड डेवलपिंग शामिल हैं।
इससे पहले 24 अगस्त को वित्त मंत्री ने बांद्रा कुर्ला कॉम्पलेक्स बिजनेस डिस्ट्रिक्ट में आयकर विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से, माल एवं सेवा कर (GST) के वरिष्ठ अधिकारियों से और भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) के आयोजित समारोह में उद्योग जगत के दिग्गजों से मिलीं।
भारतीय अर्थव्यवस्था के भविष्य से जुड़े रुझानों और क्षेत्रों को सुविधाजनक बनाने की सरकार की इच्छा व्यक्त करते हुए वित्त मंत्री ने स्वीकार किया कि वित्तीय क्षेत्र में मौलिक परिवर्तन हो रहे हैं, जिन्हें सरकारी नीतियों द्वारा सुगम बनाया जाना चाहिए। अर्थव्यवस्था धीरे-धीरे बैंकों पर निर्भर कर्ज मॉडल से बाजार पर ज्यादा आधारित वित्तीय मॉडल की ओर बढ़ रही है। वित्त मंत्री ने 'भारत की अपनी इक्विटी पूंजी बनाने' के लिए सरकार और उद्योग जगत के साथ मिलकर काम करने के महत्व पर जोर दिया।
नेशनल मॉनेटाइजेशन पाइप लाइन लांच
गौरतलब है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन योजना की शुरुआत का एलान किया। इसके तहत सरकार अपनी कम इस्तेमाल में आ रहीं संपत्तियों के जरिए करोड़ों रुपए जुटाना चाहती है। इसके लिए सरकार अपनी कोई संपत्ति नहीं बेचेगी। दावा है कि इसके लिए कोई निजीकरण भी नहीं होगा।