पाकिस्तान के राजनीतिक-आर्थिक हालात जगजाहिर हैं। पाकिस्तान आर्थिक संकट से जूझ रहा है, देश में राजनीतिक अस्थिरता इसके लिए जिम्मेदार हैं। पाकिस्तान के कार्यवाहक वित्त मंत्री शमशाद अख्तर इस बात से सहमत है। एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा, हम नकदी संकट से जूझ रहे हैं, जिससे आर्थिक वृद्धि पर रोक लगी इस तरह की स्थिति के लिए राजनीतिक अस्थिरता ही जिम्मेदार है।
सतत विकास सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, पिछले दशक में आधारभूत संरचनाओं में देरी, बड़े आर्थिक झटके, मामलों की लम्बी कार्रवाईयों ने स्थिति कठिन कर दी है। अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी की कीमतों में वृद्धि, तरलता की सख्ती ने स्थिति कमजोर कर दी है। इन्हीं कारणों के चलते पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय क्रेडिट बाजारों से बाहर हो गया है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान की साख में गिरावट आई है।
अपने संबोधन में उन्होंने कहा, अस्थिर ऋण स्थिति के कारण जोखिम ज्यादा बढ़ गया है। दो दशकों में बड़े राजकोषीय, व्यापार गाटे ने ऋण की स्थिति को निर्बल कर दिया है। वित्त वर्ष 2023 में ऋण भुगतान की लागत एफबीआर राजस्व के 74 प्रतिशत तक बढ़ गई है। पाकिस्तान जलवायु परिवर्तन के लिए कर्ज के रास्तों को ढूंढ रहा है।
विश्व बैंक की रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने कहा, यदि देश में आर्थिक स्थिर सुदृढ़ की जाए तो 2047 में देश की अर्थव्यवस्था वित्त वर्ष 2023 में 350 बिलियन अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 2047 तक दो ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर हो जाएगी। लेकिन इसके लिए हमें संरचनात्मक सुधारों पर काम करना होगा। चालू वित्त वर्ष में जीडीपी 2 से 3 प्रतिशत के आसपास रहेगी।