विश्व बैंक के अध्यक्ष अजय बंगा और ओला इलेक्ट्रिक के सह-संस्थापक भाविश अग्रवाल सहित आठ भारतीयों और भारतीय मूल के लोगों को टाइम पत्रिका की ओर से तैयार जलवायु परिवर्तन रोकने की दिशा में पहल करने वाले दुनिया के सबसे प्रभावशाली नेताओं की पहली सूची में शामिल किया गया है।
'टाइम 100 क्लाइमेट' सूची में दुनिया भर के सीईओ, संस्थापक, परोपकारी, संगीतकार, नीति निर्माता और सरकारी अधिकारी शामिल किए गए हैं। यह सूची 30 नवंबर से संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में होने वाले 2023 संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन से पहले जारी की गई है।
बंगा और अग्रवाल के साथ, द रॉकफेलर फाउंडेशन के अध्यक्ष राजीव जे शाह; बोस्टन कॉमन एसेट मैनेजमेंट की संस्थापक और अध्यक्ष गीता अय्यर, अमेरिकी ऊर्जा ऋण कार्यक्रम विभाग कार्यालय के निदेशक जिगर शाह; मनोज सिन्हा, हस्क पावर सिस्टम्स के सीईओ और सह-संस्थापक; कैसर परमानेंट के पर्यावरण प्रबंधन की कार्यकारी निदेशक सीमा वाधवा और महिंद्रा लाइफस्पेस के प्रबंध निदेशक और सीईओ अमित कुमार सिन्हा भी इस सूची में शामिल हैं।
टाइम के अनुसार, जून में विश्व बैंक समूह के अध्यक्ष के रूप में अपना पांच साल का कार्यकाल शुरू करने वाले 64 वर्षीय बंगा जलवायु परिवर्तन से लड़ते हुए गरीबी उन्मूलन की दिशा में संस्था के लिए एक नए मिशन की शुरुआत कर रहे हैं। मोरक्को में 2023 विश्व बैंक समूह-आईएमएफ की वार्षिक बैठक में उन्होंने कहा, "यदि आप सांस नहीं ले सकते हैं और आप साफ पानी नहीं पी सकते हैं, तो गरीबी उन्मूलन का बहुत कम मतलब है।"
भारत दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला देश है, और यहां सस्टेनेबल ट्रांसपोर्टेशन को अपनाया जाना बहुत महत्वपूर्ण है। पत्रिका ने कहा कि भारत की सड़कों पर करीब 70 प्रतिशत वाहन मोपेड और स्कूटर हैं और 38 वर्षीय अग्रवाल उन्हें इलेक्ट्रिक में बदलने की दिशा में काम कर रहे हैं। इस साल, ओला ने अपना अब तक का सबसे किफायती इलेक्ट्रिक स्कूटर लॉन्च किया, जिसकी कीमत 79,999 रुपये (लगभग 960 अमरीकी डाॅलर) है।
राजीव शाह का द रॉकफेलर फाउंडेशन यह सुनिश्चित करने के लिए काम करता है कि सभी पहल और निवेश रणनीतियों को जलवायु परिवर्तन को देखते हुए तैयार किया जाए। इस साल, रॉकफेलर फाउंडेशन ने कोल टू क्लीन क्रेडिट इनिशिएटिव लॉन्च करने के लिए ग्लोबल एनर्जी एलायंस फॉर पीपुल एंड प्लैनेट के साथ भागीदारी की। पत्रिका ने कहा कि इसका उद्देश्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं में कोयले से चलने वाले बिजली संयंत्रों से नवीकरणीय ऊर्जा की ओर बढ़ने के लिए एक नया कार्बन वित्त मानक विकसित करना है।