प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने महादेव ऑनलाइन बुक ऐप के जरिए कथित अवैध सट्टेबाजी और गेमिंग से जुड़े धनशोधन के एक मामले में रायपुर की एक विशेष अदालत के समक्ष नया आरोपपत्र दायर किया है। अधिकारियों ने बताया कि संघीय एजेंसी इस दूसरी अभियोजन शिकायत (आरोपपत्र) को दुबई में अधिकारियों के साथ साझा करेगी ताकि एप के दो मुख्य प्रमोटर्स रवि उप्पल और सौरभ चंद्राकर का प्रत्यर्पण सुनिश्चित किया जा सके।
ईडी के कहने पर दोनों को हाल ही में इंटरपोल की ओर से जारी रेड नोटिस के आधार पर दुबई में हिरासत में लिया गया था। समझा जाता है कि एजेंसी ने पहले आरोपपत्र की सामग्री यूएई के अधिकारियों के साथ साझा की जिसके आधार पर दोनों के खिलाफ गैर जमानती वारंट हासिल किया गया जिसके बाद इंटरपोल ने रेड नोटिस जारी किया।
एप के मालिक होने का दावा करने वाले सोनी ने इससे पहले एक वीडियो बयान जारी किया था और ईडी को एक हलफनामा भेजा था, जिसमें दावा किया गया था कि उनके पास राजनेताओं और उनसे जुड़े व्यक्तियों को रिश्वत दिए जाने के बारे में "सबूत" हैं, ताकि एप को बिना किसी कानूनी कार्रवाई के अपना अवैध व्यवसाय चलाने की अनुमति दी जा सके। एजेंसी ने रायपुर में विशेष पीएमएलए अदालत के समक्ष दायर अपने पहले आरोपपत्र में चंद्राकर और उप्पल के साथ कुछ अन्य को भी नामजद किया था।
ईडी के अनुसार, इस मामले में अपराध की अनुमानित आय लगभग 6,000 करोड़ रुपये है। एजेंसी ने छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के पहले चरण से ठीक पहले नवंबर में दावा किया था कि फॉरेंसिक विश्लेषण और असीम दास की ओर से दिए गए बयान में चौंकाने वाले आरोप लगाए गए हैं। इसके अनुसार महादेव सट्टेबाजी एप के प्रमोटर्स ने छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता भूपेश बघेल को अब तक लगभग 508 करोड़ रुपये का भुगतान किया है। बघेल ने इन आरोपों को उनकी छवि खराब करने का प्रयास बताया था, जबकि कांग्रेस ने अपने तत्कालीन सीएम के खिलाफ इसे केंद्र की "प्रतिशोध की राजनीति" कहा था।
दास ने बाद में रायपुर में विशेष अदालत के समक्ष कहा था कि उन्हें साजिश के तहत फंसाया गया है और उन्होंने कभी भी राजनेताओं को नकदी नहीं पहुंचाई। दोनों प्रमोटर छत्तीसगढ़ के भिलाई शहर के रहने वाले हैं और महादेव ऑनलाइन बुक बेटिंग एप्लिकेशन एक अंब्रेला सिंडिकेट है जो अवैध सट्टेबाजी वेबसाइट्स को सक्षम करने के लिए ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की व्यवस्था करता है।