प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शनिवार को एक बयान जारी कर कहा कि मनी लॉन्ड्रिंग मामले में शनिवार को बिहार के एक भू-माफिया की संपत्ति कुर्क की गई है। ईडी के अनुसार, धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत चांदराम प्रसाद सिंह उर्फ टुनटुन सिंह और उनके परिवार के सदस्यों समेत इस मामले में शामिल अन्य की 4.04 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क करने का अस्थायी आदेश जारी किया गया है।
प्रवर्तन निदेशालय ने बताया कि बिहार की राजधानी पटना के मनोहरपुर कच्छुआरा इलाके के निवासी टुनटुन सिंह और उनके भाई अपने क्षेत्र के भू-माफिया हैं और जबरन वसूली और अन्य आपराधिक गतिविधियों में भी लिप्त हैं। इसके साथ ही उन्होंने कई निर्दोष लोगों, किसानों और बिल्डरों के साथ धोखाधड़ी भी की है। ईडी ने बिहार पुलिस द्वारा टुनटुन सिंह और अन्य के खिलाफ दायर कम से कम आठ प्राथमिकी और सात आरोपपत्रों का अध्ययन करने के बाद पीएमएलए की आपराधिक धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। एजेंसी ने कहा है कि आरोपी ने अपनी पत्नी के नाम पर खरीदी गई विभिन्न चल और अचल संपत्तियों में अपराध की आय का निवेश किया है।
ईडी ने मैंगलोर रिफाइनरीज के डीजीएम की 2.14 करोड़ की संपत्ति की जब्त
प्रवर्तन निदेशालय ने मैंगलोर रिफाइनरीज एंड पेट्रो केमिकल्स लिमिटेड के उप महाप्रबंधक निरंजन गुप्ता व उनकी पत्नी प्रीति गुप्ता की 2.14 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्ति को जब्त किया है। यह कार्रवाई आय से अधिक संपत्ति से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में की गई।
ईडी की ओर से जारी बयान के मुताबिक जब्त की गई संपत्ति में मैंगलोर के कुलाई इलाके के दो रिहायशी फ्लैट और डीमेट अकाउंट के कुछ शेयर शामिल हैं। ईडी ने सीबीआई और बेंगलुरु की एंटी करप्शन शाखा की एफआईआर के आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग जांच शुरू की है।
आरोप है कि 2012 से 18 के दौरान डीजीएम ने अपने और अपनी पत्नी के नाम पर बड़ी संख्या में चल और अचल संपत्ति अर्जित की जिसकी कीमत उसकी आय के मुकाबले बहुत ज्यादा है। यही नहीं गुप्ता ने अपने और पत्नी के बैंक खातों में भारी मात्रा में नकदी भी जमा कराई। इस रकम का कोई लेखा जोखा उनके पास नहीं मिला। इसी आपराधिक आय से उन्होंने संपत्ति खरीदी जिसे जब्त किया गया।