सेबी प्रमुख माधबी पुरी बुच पर लगे आरोपों पर कांग्रेस एक बार फिर हमलावर हो गई है। अब पार्टी ने आईसीआईसीआई बैंक से रिटायरमेंट के बाद बुच को दी गई राशि पर सवाल उठाया है। मंगलवार को सेबी चेयरमैन के खिलाफ आरोपों पर कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने कहा, "उनका सेवानिवृत्ति लाभ आईसीआईसीआई में रहने के दौरान उनके वेतन से अधिक कैसे हो सकता है? अब हम मांग करना चाहते हैं कि सेबी को सफाई देनी चाहिए, स्पष्टीकरण देना चाहिए और हमारे आरोपों का जवाब देना चाहिए।" पवन खेड़ा ने कहा कि सेबी प्रमुख पर लगे आरोपों से देश में बड़ी संख्या में निवेशकों का भरोसा डिगा है। इसलिए सेबी को इस मामले में खुद से सामने आकर स्थिति साफ करनी चाहिए।
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि बुच के 2017 में पदभार संभालने के बाद से, वह न केवल सेबी से वेतन ले रही हैं, बल्कि आईसीआईसीआई बैंक में भी लाभ का पद संभाल रही हैं।खेड़ा ने कहा कि आईसीआईसीआई बैंक का दावा है कि बुच को भुगतान की गई राशि बैंक में उनके काम करते हुए अर्जित की गई थी और यह उनका "सेवानिवृत्ति लाभ" है। उन्होंने पूछा कि यह तथाकथित "सेवानिवृत्ति लाभ" अपनी आवृत्ति और राशि दोनों के संदर्भ में असमान क्यों है। खेड़ा ने एआईसीसी मुख्यालय में एक संवाददाता सम्मेलन के दौरान यह सवाल पूछा।
खेड़ा ने कहा, "भले ही हम यह मान लें कि 2014-2015 में (उनकी सेवानिवृत्ति के तुरंत बाद) आईसीआईसीआई से उन्हें मिले 5.03 करोड़ रुपये उनके सेवानिवृत्ति लाभ का हिस्सा थे और उन्हें 2015-2016 में कुछ भी नहीं मिला , फिर भी यह तथाकथित सेवानिवृत्ति लाभ 2016-2017 में फिर से क्यों शुरू हुआ और 2021 तक जारी रहा?"
खेड़ा ने पूछा कि क्या बुच को दिए गए ईएसओपी कर्मचारी ईएसओपी ट्रस्ट से लिए गए थे और यदि ऐसा था, तो क्या यह आईसीआईसीआई के अन्य कर्मचारियों के हितों के लिए हानिकारक नहीं था। उन्होंने यह भी पूछा कि आईसीआईसीआई ने बुच की ओर से ईएसओपी पर टीडीएस का भुगतान क्यों किया और क्या यह अपने सभी पूर्व और वर्तमान कर्मचारियों के लिए समान प्रोटोकॉल का पालन करता है।
खेड़ा ने पूछा, "आईसीआईसीआई ने इस टीडीएस राशि को माधबी पी बुच की कर योग्य आय के रूप में क्यों नहीं पेश किया? क्या यह आयकर अधिनियम का स्पष्ट उल्लंघन नहीं है?" कांग्रेस ने सोमवार को आरोप लगाया कि बुच, जो 2017 में एक सदस्य के रूप में भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) में शामिल हुईं और बाद में इसकी अध्यक्ष बनीं, ने आईसीआईसीआई बैंक से वेतन और अन्य मुआवजे के रूप में 16.8 करोड़ रुपये प्राप्त किए।
एक बयान में, बैंक ने कहा, "आईसीआईसीआई बैंक या इसकी समूह कंपनियों ने माधबी पुरी बुच को उनकी सेवानिवृत्ति के बाद उनके सेवानिवृत्ति लाभों के अलावा कोई वेतन नहीं दिया है या कोई ईएसओपी नहीं दिया है। यह ध्यान दिया जा सकता है कि उन्होंने 31 अक्टूबर, 2013 से सेवानिवृत्ति का विकल्प चुना था।" बैंक के अनुसार आईसीआईसीआई समूह के साथ अपने रोजगार के दौरान, उन्हें (बुच को) लागू नीतियों के अनुरूप वेतन, सेवानिवृत्ति लाभ, बोनस और ईएसओपी के रूप में मुआवजा मिला।
बैंक ने कहा, "बैंक के ईएसओपी नियमों के तहत, ईएसओपी आवंटन की तारीख से अगले कुछ वर्षों के लिए निहित होते हैं। ईएसओपी अनुदान के समय मौजूद नियमों के अनुसार, सेवानिवृत्त कर्मचारियों सहित कर्मचारियों के पास निहित होने की तारीख से 10 वर्ष की अवधि तक किसी भी समय अपने ईएसओपी का उपयोग करने का विकल्प था।"