सरकार शुक्रवार को वित्त वर्ष 2024-25 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) के लिए आज जीडीपी के आंकड़े जारी करने जा रही है। आने वाले आंकड़ों में बीते कुछ महीनों में पड़ी गर्मी का असर दिख सकता है। बाजार के अनुसार, पिछले तिमाही की तुलना में इस बार विकास दर में नरमी दिख सकती है। हालांकि, इक्विरस सिक्योरिटीज की एक रिपोर्ट के अनुसार, विश्लेषक आशावादी बने हुए हैं, उन्होंने कहा कि मंदी के कोई स्पष्ट संकेत नहीं हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि फिलहाल अनुकूल मौसम और आने वाले त्योहारी सीजन किसी भी अस्थायी रुकावट की स्थिति को बदल सकता है।
रिपोर्ट में कहा गया है , "हालांकि मंदी के कोई संकेत नहीं हैं , लेकिन यह एक अस्थायी रुकावट हो सकती है। हालांकि, स्थिर व्यापक आर्थिक संकेतकों के अच्छे प्रदर्शन से संभावनाएं आशावादी बनी हुई हैं।" रिपोर्ट के अनुसार जलवायु परिस्थितियों और बाहरी मांग से उत्पन्न चुनौतियों के बावजूद, भारतीय अर्थव्यवस्था का समग्र दृष्टिकोण सकारात्मक बना हुआ है। रिपोर्ट में कहा गया है कि, "फिलहाल अनुकूल मौसम और त्यौहारी सीजन के आने से अस्थायी मंदी दूर हो सकती है।"
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति के दो बाहरी सदस्यों, जिन्होंने ब्याज दरों को कम करने की वकालत की थी, का कार्यकाल समाप्त होने वाला है, जिससे मौद्रिक नीति के भविष्य की दिशा पर सवाल उठ रहे हैं। उनका कार्यकाल 4 अक्टूबर को समाप्त हो रहा है, जबकि अगली नीति बैठक 9 अक्टूबर को है। यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि आरबीआई के गवर्नर शक्तिकांत दास दास का कार्यकाल भी दिसंबर 2024 में समाप्त हो रहा है। इसलिए, कोई भी नीतिगत कार्रवाई से जुड़ा निर्णय लेने की जिम्मेदारी 2025 में आने वाले गवर्नर के हाथों में हो सकती है।"
मौसमी कारकों, नीतिगत निर्णयों और बाहरी स्थितियों का परस्पर प्रभाव भारत के विकास के भविष्य के प्रक्षेपवक्र को आकार देने में महत्वपूर्ण होगा। जैसे ही डेटा जारी होगा, सभी की निगाहें इस बात पर होंगी कि ये तत्व देश के आर्थिक दृष्टिकोण को कैसे प्रभावित करते हैं।