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सरकारी बैंकों की वित्तीय सेहत का आकलन, बजट से मिल सकते हैं 30,000 करोड़ रुपये

Thu, 04 Jul 2019 01:10 PM IST
गौरव द्विवेदी बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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निर्मला सीतारमण (फाइल फोटो) - फोटो : सोशल मीडिया
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वित्त मंत्रालय ने सरकारी बैंकों के पूंजी आधार का मूल्यांकन किया और उन्हें नियम के तहत न्यूनतम पूंजी की शर्त को पूरा करने में मदद के लिए चालू वित्त वर्ष के आम बजट में 30,000 करोड़ रुपये उपलब्ध करा सकता है। मंत्री निर्मला सीतारमण पांच जुलाई को नई सरकार का पहला बजट पेश करेंगी। आर्थिक वृद्धि नरम हो कर 2018-19 में 6.8 प्रतिशत पर आ गई है। बजट में वृद्धि को तेज करने की चुनौती है। इसमें बैंकिंग क्षेत्र का महत्वपूर्ण योगदान होगा। 

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सरकारी बैंकों को निजी और व्यावसायिक काम के लिए पर्याप्त पूंजी की आवश्यकता होगी। इसके अलावा आरबीआई के त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई (पीसीए) ढांचे के तहत पांच कमजोर बैंकों को बासेल-3 नियमों के तहत जरूरी पूंजी बनाये रखने की भी जरूरत होगी।

सूत्रों ने बताया कि अगर सरकार बैंक ऑफ बड़ौदा की तरह कुछ अन्य बैंकों के एकीकरण पर भी विचार करती है तो उसके लिए भी अतिरिक्त पूंजी की आवश्यकता होगी। उल्लेखनीय है कि बीओबी में देना बैंक और विजया बैंक के विलय के कारण अतिरिक्त खर्च की पूर्ति के लिए सरकार ने 5,042 करोड़ रुपए की पूंजी नए बैंक में डाली थी। सरकार ने पिछले वित्त वर्ष में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को 1,06,000 करोड़ रुपए की पूंजी उपलब्ध कराई थी। 

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