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एक अप्रैल से 10 बैंकों का चार में हो जाएगा विलय, सरकार ने दी मंजूरी 

Wed, 04 Mar 2020 07:04 PM IST
अमित कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण - फोटो : ANI
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केंद्र सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र के 10 बैंकों को मिला कर चार बनाने के फैसले पर अंतिम मुहर लगा दी है। यह फैसला हर हाल में आगामी एक अप्रैल से प्रभावी होगा। यह फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई बुधवार को हुई मंत्रिमंडल की बैठक में हुआ। 

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मंत्रिमंडल की बैठक के बाद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया कि सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र के 10 बैंकों मिला कर चार बैंक बनाने के फैसले को मंजूरी दे दी है। साथ ही मंत्रिमंडल ने विलय होने वाले बैंकों द्वारा पेश की गई विलय योजना को भी हरी झंडी दे दी है। सीतारमण ने कहा कि बैंक विलय की समयसीमा यानी एक अप्रैल के लिए पूरी तरह तैयार हैं। वित्त मंत्री ने कहा कि इससे विलय होने वाले बैंको के मुख्य बैंकिंग कार्य बाधित नहीं होंगे।

सरकार ने पिछले साल अगस्त में सार्वजनिक क्षेत्र के 10 बैंकों का चार बैंकों में विलय करने का निर्णय किया था। यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया और ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स का विलय पंजाब नेशनल बैंक में होना है। इस विलय के बाद पीएनबी इस साल एक अप्रैल से भारत का दूसरा सबसे बड़ा बैंक बन जाएगा।
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इसके अलावा सिंडिकेट बैंक का केनरा बैंक और इलाहबाद बैंक का इंडियन बैंक के साथ विलय होना है। इसी प्रकार आंध्रा बैंक तथा कॉरपोरेशन बैंक का यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के साथ विलय होगा।

सफल रहा है प्रयोग
निर्मला सीतारमण ने कहा कि इससे पहले बैंक ऑफ बड़ौदा में देना बैंक और विजया बैंक का विलय किया जा चुका है और यह प्रयोग सफल रहा है। इससे ग्राहकों को ज्यादा सुविधाएं मिलनी शुरू हुई। पहले उन बैंकों में किसी लोन के मंजूर होने में 23 दिन का समय लगता था जो कि अब घट कर 11 दिन रह गया है। यही नहीं, बैंक के ऑपरेटिंग प्रोफिट में 11 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।

मंत्रिमंडल की इसी बैठक के दौरान कंपनी कानून में कई महत्वपूर्ण बदलावों को भी मंजूरी मिली है ताकि 'ईज ऑफ डूइंग' बिजनेस में बढ़ोतरी हो सके। सीतारमण ने बताया कि वर्ष 2013 में बने कंपनी कानून की 65 धाराओं में 72 बदलावों को मंत्रिमंडल की अनुमति मिली है। 

इनमें कानून तोड़ने से जुड़ी विभिन्न गलतियों को अपराध की श्रेणी से अलग रखना भी शामिल है। उन्होंने कहा कि इस कानून में अपराधमुक्त वाले प्रावधानों को प्राथमिकता से लिया गया है। उन्होंने बताया कि कानून में 66 कंपाउंडेबल ओफेंस में से 23 को अलग किया जाएगा। वहीं, सात कंपाउंडेबल ओफेंस को खत्म कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि अब साल में 50 लाख रुपये या उससे कम का मुनाफा कमाने वाली कंपनियों पर निगम सामाजिक दायित्व का कानून लागू नहीं होगा। मतलब उन्हें मुनाफे की दो फीसदी राशि सीएसआर पर खर्च नहीं करना होगा।

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