न्यूट्रिनो की खोज करने वाले वैज्ञानिक फ्रांसिस हाल्जन
- फोटो : एक्स/The Nobel Prize
न्यूट्रिनो को ब्रह्मांड का सबसे रहस्यमयी कण माना जाता है। न्यूट्रिनो पदार्थ से बेहद कम प्रतिक्रिया करते हैं और आसानी से गुजर जाते हैं। इसलिए इसे पकड़ना और इनका अध्ययन करना बेहद मुश्किल है। न्यूट्रिनो मुख्य रूप से तीन प्रकार के होते हैं, इलेक्ट्रॉन न्यूट्रिनो, म्यूऑन न्यूट्रिनो और टाऊ न्यूट्रिनो। इनसे संबंधित एंटीपार्टिकल भी होते हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि न्यूट्रिनो एक प्रकार से लेप्टॉन है और यह मानक मॉडलका हिस्सा है।
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वैज्ञानिकों के मुताबिक, न्यूट्रिनो का प्राकृतिक रूप से कई स्रोतों से जन्म होता है। सूर्य के भीतर होने वाली परमाणु संलयन (न्यूक्लियर फ्यूजन) प्रक्रियाओं, सुपरनोवा विस्फोटों और रेडियोधर्मी क्षय के दौरान बड़ी संख्या में न्यूट्रिनो पैदा होते हैं। धरती के वायुमंडल में कॉस्मिक किरणों से टकराने से भी न्यूट्रिनो पैदा होते हैं। इसके साथ ही परमाणु रिएक्टर और कण त्वरक भी न्यूट्रिनो के कृत्रिम स्रोत हैं।
न्यूट्रिनो की एक खासियत यह भी है कि वे न्यूट्रिनो दोलन कर सकते हैं, जिसका मतलब है कि यात्रा करते समय एक प्रकार का न्यूट्रिनो दूसरे प्रकार में बदल सकता है। इस खोज से यह प्रमाणित हुआ कि न्यूट्रिनो का द्रव्यमान शून्य नहीं है। ताकाकी काजिता और आर्थर बी. मैकडोनाल्ड को 2015 में न्यूट्रिनो दोलन की खोज के लिए भौतिकी का नोबेल पुरस्कार दिया गया।
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हर सेकेंड अरबों न्यूट्रिनो हमारे शरीर और पृथ्वी से होकर गुजरते हैं, लेकिन ज्यादातर बिना किसी टकराव निकल जाते हैं। वैज्ञानिक न्यूट्रिनो का अध्ययन करके सूर्य, सुपरनोवा और ब्रह्मांड की मौलिक प्रक्रियाओं को समझने की कोशिश में लगे हैं।