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यहां लात-घूंसों और थप्पड़ों से होता है मरीजों का इलाज!

Sat, 23 Jul 2016 10:29 AM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, नई दिल्ली
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- फोटो : Getty Images
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आमतौर पर बीमारों के साथ हमदर्दी बरती जाती है और उनका खास ख्याल रखा जाता है। लेकिन एक जगह ऐसी है जहां बीमार को लात घूंसों औऱ थप्पड़ों से पीटा जाता है।
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चौंकिए मत! दरअसल ऐसी पिटाई मरीजों के इलाज के नाम पर की जाती है और मरीज भी ऐसे जो ठीक होने के लिए खुशी-खुशी लात घूंसे खाने आते हैं।

छत्तीसगढ़ के लाड़ेर गांव में रहते हैं मनसाराम। मनसाराम खुद को डॉक्टर कहते हैं लेकिन कोई डिग्री उनके पास नहीं है। लेकिन मनसाराम को डिग्री की जरूरत भी नहीं है क्योंकि उनका क्लीनिक एक पेड़ के नीचे चलता है और बिना डिग्री भी हजारों लोग इलाज की आस लिए उनके पास आते रहते हैं।

थप्पड़ और लात घूसे खाकर भी मरीज चूं नहीं करते

सुबह से शाम तक हजारों मरीज लाइन में खड़े रहते हैं। जिस मरीज का नंबर आता है, उसे पेड़ के नीचे बुलाकर मनसाराम अनोखा इलाज कर डालते हैं। 

वो मरीजों को जमकर लात घूंसे मारते हैं औऱ कई बार थप्पड़ भी लगाते हैं। मरीज की हिम्मत देखिए कि एक बार भी चूं नहीं करता। दूसरी तरफ मरीज को लेकर आए तीमारदार भी मनसाराम की तारीफ करते हैं। 

दरअसल मनसाराम का दावा है कि वो अपने लात घूंसों से हर तरह की लाइलाज बीमारी का इलाज कर सकते हैं। वो बीमार लोगों को लात-घूसे और थप्पड़ मारते हैं और इससे ही लोगों की बीमारी दूर हो जाती है। इस बात की पुष्टि गांव के लोग भी करते हैं।

मनसाराम का कहना है कि पहले वो किसान थे। लेकिन कुछ सालों पहले देवी मां ने उनके सपने में आकर लोगों का दुख दूर करने का आदेश दिया।

मनसाराम का दावा है कि देवी ने सपने में कहा कि तेरे हाथ पैरों में दैवीय शक्ति है और तू लात घूंसों से जनता के दुख कम कर। तबसे वो मरीजों का इलाज लात घूंसों से कर रहे हैं।
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थप्पड़ों से इलाज की बात कितनी हकीकत कितना झूठ!

- फोटो : Getty Images
अब ये सच में चमत्कार है या अंधविश्वास ये तो आपको ही तय करना है। लेकिन उनसे इलाज कराने आए अधिकतर लोग पहली बार ही आते हैं। इन्हें मनसाराम से इलाज के बारे में अपने जान पहचान वालों से पता चलता है। बताया जाता है कि मनसाराम के पास आए अधिकतर लोग अनपढ़ होते हैं जिन्हें इलाज की ज्यादा जानकारी नहीं होती। वो तो बस मनसाराम को ही अपना डॉक्टर और भगवान समझते हैं।

मनसाराम मरीजों को अपने पास तीन बार बुलाते हैं। उनका कहना है कि बीमारी को जड़ से मिटाने के लिए तीन बार आना जरूरी है तभी उनकी बीमारी पूरी तरह से ठीक हो पाएगी।

मनसाराम अपने पास इलाज कराने आए लोगों से पैसे तो नहीं लेते, लेकिन इलाज के लिए आए लोग अपने हैसियत के हिसाब से अच्छा खासा चढ़ावा उन्हें देते रहते हैं। 
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