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एक ऐसा देश, जहां सात से अधिक बच्चे पैदा करने पर मां को मिलता है स्वर्ण पदक

Mon, 04 Nov 2019 04:13 PM IST
सोनू शर्मा फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कजाखस्तान के अजीबोगरीब नियम - फोटो : BBC
कई देशों की सरकारें ज्यादा बच्चे होने पर नागरिकों को आर्थिक प्रोत्साहन देती हैं, मगर कजाखस्तान ऐसे देशों से बहुत आगे है। कजाखस्तान में बड़े परिवारों को बढ़ावा दिया जा रहा है। यहां की सरकार चाहती है कि परिवारों में अधिक बच्चे हों। इसलिए, इस देश की जन्म दर बढ़ाने में योगदान देने वाली वाली मांओं को 'हीरो मदर्स' का मेडल दिया जाता है।
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कजाखस्तान के अजीबोगरीब नियम - फोटो : BBC
किसी परिवार में छह बच्चे होने पर मां को रजत पदक दिया जाता है। सात या उससे ज्यादा बच्चे पैदा करने पर मां को स्वर्ण पदक से नवाजा जाता है। पदक पाने वाली मांओं को सरकार से ताउम्र मासिक भत्ता भी मिलता है। 
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कजाखस्तान के अजीबोगरीब नियम - फोटो : BBC
कजाखस्तान की रहने वाली रौशन कोजोमकुलोवा 10 बच्चों की मां हैं। उनके पास रजत और स्वर्ण पदक दोनों हैं। अपनी इन उपलब्धियों पर कोजोमकुलोवा को फख्र है। उनके घर में आठ लड़कियां और दो लड़के हैं। खाने की मेज पर सभी बच्चे एक साथ खाना खा रहे हैं। सबसे छोटा बच्चा बड़े भाई की गोद में बैठकर खाना खा रहा है। कोजोमकुलोवा अपने मेडल बैज टी-शर्ट के ऊपर लगाकर दिखाती हैं। स्वर्ण पदक मिलने के बाद वह उम्र भर सरकारी भत्ते की हकदार हैं।

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कजाखस्तान के अजीबोगरीब नियम - फोटो : BBC
बक्तीगुल हलाइकबेवा के छह बच्चे हैं। उनको सिल्वर मेडल मिला है और सरकार से हर महीने भत्ता मिलता है। हलाइकबेवा का एक बेटा अभी गोद में है। वह कहती हैं, 'यह सबसे छोटा है जो चार साल का है। सबसे बड़ा 18 साल का है।' जो माताएं मेडल नहीं जीत पातीं, वे भी सरकार से आर्थिक सहायता पा सकती हैं। जिन परिवारों में चार बच्चे हैं, उनको भत्ता दिया जाता है, जब तक कि बच्चे 21 साल के न हो जाएं। कजाखस्तान के श्रम और सामाजिक कार्यक्रम विभाग की अक्साना एलुसेजोवा कहती हैं, 'हमारी सरकार की नीति है कि हमें अपने देश में ज्यादा बच्चे चाहिए। सभी लोग इस बारे में हमेशा बात करते हैं कि ज्यादा बच्चे हों, जिससे हमारी आबादी बड़ी हो।'
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कजाखस्तान के अजीबोगरीब नियम - फोटो : BBC
माताओं को पदक से नवाजने और आर्थिक मदद देने की प्रथा सोवियत संघ के समय शुरू हुई थी। 1944 में सोवियत संघ ने 'मदर हीरोइन' पुरस्कार शुरू किया था। यह उन परिवारों को दिया जाता था, जिनमें 10 या अधिक बच्चे हों। मांओं को सम्मानित करने के लिए सोवियत सरकार उनको सितारे जैसा बैज और प्रशस्ति-पत्र देती थी।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
सोवियत समय की तुलना में अब यह पुरस्कार छोटे परिवारों को भी मिलने लगा है, क्योंकि जन्म दर ऊंची रखना अब भी कजाखस्तान सरकार की प्राथमिकता है। हीरो मदर कहलाने के लिए अब कम से कम चार बच्चे होने जरूरी हैं। सरकार गर्भवती महिलाओं और एकल मां को भी आर्थिक सहायता देती है, लेकिन सिर्फ पहले साल। जिन मांओं के चार से कम बच्चे हैं, उनको सरकार से कोई मासिक भुगतान नहीं मिलता। कुछ लोगों की मांग है कि इस योजना को दो या दो से अधिक बच्चों वाली मां के लिए भी लागू करना चाहिए।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
हलाइकबेवा कहती हैं, 'कुछ लोग छोटे परिवारों में ज्यादा बच्चे पैदा करने से डरते हैं, क्योंकि सरकार सिर्फ पहले साल उनकी मदद करती है। यह एक वजह हो सकती है।' हलाइकबेवा रसोई में खाना बना रही हैं. उनका सबसे छोटा बेटा वहीं मां को पकड़कर खड़ा है। वह कहती हैं, 'मुझे हर महीने एक लाख 44 हजार टेंगे (370 अमेरिकी डॉलर या 26,270 रुपये) मिलते हैं। यह पर्याप्त है। मैं इतने पैसे में गुजारा करने की कोशिश करती हूं, लेकिन मैं काम भी करती हूं, जिससे सब मिलाकर हमारे लिए कोई कमी न हो। मुझे किसी चीज की शिकायत नहीं है। रौशन कोजोमकुलोवा भी अपनी स्थिति से संतुष्ट हैं। वह कहती हैं, यह वैसा नहीं है जैसा पहले हुआ करता था। पहले हमारा मासिक भत्ता कम था। अब मैं कोई शिकायत नहीं कर रही हूं। सब कुछ बहुत अच्छा है।  
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