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दुनिया की एक ऐसी रहस्यमय सभ्यता, जिसके खंडहर आज भी करते हैं हैरान

Sun, 07 Jun 2020 01:06 PM IST
सोनू शर्मा फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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रहस्यमय सभ्यता के खंडहर - फोटो : Social media
करीब एक हजार साल पहले चाको सभ्यता के लोग चिलचिलाते रेगिस्तान में फले-फूले थे। आज भी उनकी इमारतों के खंडहर उनकी संस्कृति के बारे में बहुत कुछ बताते हैं, लेकिन अब उन ढांचों पर खतरा मंडरा रहा है। न्यू मेक्सिको के उत्तर पश्चिमी क्षेत्र के बंजर कोने में सैन जुआन बेसिन के बीच अमेरिका की महान प्राचीन विरासतों में से एक स्थित है। करीने से संरक्षित एक विशाल परिसर के खंडहरों के बारे में माना जाता है कि इनको 850 ईस्वी से 1250 ईस्वी के बीच बनाया गया था और यहां 5,000 लोग रहते थे। 

चाको दर्रे के ऊपरी रेगिस्तानी क्षेत्र में भयंकर ठंड पड़ती है। यहां चिलचिलाती हुई गर्मी भी पड़ती है और साल में औसतन सिर्फ 22 सेंटीमीटर बारिश होती है। इन दुश्वारियों के बावजूद यह एक समृद्ध मगर रहस्यमय सभ्यता का केंद्र था। यहां रहने वाले चाकोन लोग प्यूब्लो आदिवासी समुदाय के पूर्वज थे। यहां की इमारतों को देखकर लगता है कि वे अपना अस्तित्व बचाए रखने से बहुत ज्यादा काम कर रहे थे। 1907 में 53 वर्ग मील का यह निर्जन रेगिस्तानी क्षेत्र एक राष्ट्रीय एतिहासिक उद्यान बना। इसमें 13 प्रमुख खंडहर और 400 से अधिक पुरातात्विक स्थल हैं। 
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रहस्यमय सभ्यता के खंडहर - फोटो : Social media
प्यूब्लो बोनिटो

प्यूब्लो बोनिटो यहां सबसे बड़ा उत्खनन स्थल है जो लगभग दो एकड़ में फैला है। इसमें करीब 800 कमरे हैं जो 'डी' आकार की इमारत में व्यवस्थित हैं। इसे सिंचाई और जल निकासी की उन्नत प्रणालियों के साथ डिजाइन किया गया था। चाको सांस्कृतिक राष्ट्रीय एतिहासिक उद्यान के पुरातत्वविद नैथन हैटफील्ड कहते हैं, 'प्यूब्लो बोनिटो उन्नत सभ्यता का केंद्र था। ये इमारतें वास्तु-शिल्प और एतिहासिक रूप से सबसे प्रमुख इमारतों में से एक हैं, न सिर्फ अमेरिका में बल्कि पूरी दुनिया में।' 

आने-जाने की सुविधा के लिए यहां के गलियारे और दरवाजे व्यवस्थित थे। शोधकर्ताओं का अनुमान है कि यहां करीब 2,000 लोग रहते होंगे। आज सैलानी उन कक्षों और रास्तों की भूल-भुलैया में घूम सकते हैं, जिनको करीब 1,000 साल पहले यहां के निवासी इस्तेमाल करते थे। 

इंडियन प्यूब्लो कल्चरल सेंटर के प्रशिक्षक जॉन गाहेट कहते हैं, 'चाको दर्रा और चाको एतिहासिक केंद्र उस सभ्यता के सबूत हैं जो कृषि पर आधारित थी और जो संभवतः पहली शताब्दी से ही शुरू हो गई थी। इस सभ्यता के लोगों ने अपने कौशल को बढ़ाया और वे विशाल बहुमंजिली संरचनाएं बनाना सीख गए थे, जिनमें 1,000 से 1,500 तक लोग रह सकें।'  
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रहस्यमय सभ्यता के खंडहर - फोटो : Social media
एतिहासिक खंडहर

छतों और विभिन्न मंजिलों को बनाने वाले कुछ ढांचे बहुत पहले ही टूट चुके हैं, लेकिन जो खंडहर बचे हुए हैं उनसे साफ-साफ पता चलता है कि इनको किस तरह से बनाया गया होगा। कुछ दीवारें चार या पांच मंजिल जितनी ऊंची हैं। यहां के कुछ कमरों का इस्तेमाल भंडारण के लिए होता था। कुछ कमरों में लोग रहते थे और बाकी कमरे बंद रहते थे। प्यूब्लो बोनिटो के सबसे बड़े और आकर्षक कमरे में जाने पर वहां की दीवारों में कुछ सुराख दिखते हैं। कुछ सुराखों में लकड़ियों के बीम लगे हैं और कुछ खाली हैं। हैटफील्ड का कहना है कि लड़कियों के बीम छत बनाने के काम आते थे। समय के साथ वे गल गए तो छतें ढह गईं, मगर दीवारें सलामत रह गईं। 

प्यूब्लो बोनिटो को बनाने में लगभग दो लाख लकड़ी के खंभों का इस्तेमाल किया गया था। संभावना यही है कि उन खंभों को यहां से 112 किलोमीटर दूर चुस्का पहाड़ों और माउंट टेलर से हाथों में उठाकर लाया गया होगा, क्योंकि उस समय चाको लोगों के पास पहिए वाली गाड़ी या किसी जानवर की मदद से ढुलाई के साधन नहीं थे। हैटफील्ड कहते हैं, 'कई रिसर्च से पता चला है कि जब लकड़ियों को यहां लाया जा रहा था, तब उनको रास्ते में कभी जमीन पर नहीं रखा गया।' 

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रहस्यमय सभ्यता के खंडहर - फोटो : Social media
चाको की चौड़ी सड़कें

चाको सभ्यता की सड़कें इस परिसर की एक और खासियत हैं। सड़कों की लंबाई कुल मिलाकर 650 किलोमीटर है, जिनमें से कुछ सड़कें नौ मीटर तक चौड़ी हैं। सड़कें अधिकतर सीधी रेखा में हैं। मुश्किल भौगोलिक संरचनाओं के इर्द-गिर्द घूमने की बजाय वे एक-दूसरे को समकोण पर काटती हैं। 

चाको की सड़कें किसी न किसी केंद्रीय संरचना से शुरू होती हैं और झीलों, तालाबों और पहाड़ों जैसे प्राकृतिक केंद्रों की ओर जाती हैं। इससे लगता है कि चाको सभ्यता में इंसान और प्रकृति के संबंधों को अहमियत दी जाती थी, लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि वे व्यावहारिक नहीं थे। उनकी बनाई सड़कों पर चलना बगल के उबड़-खाबड़ रास्तों पर चलने से कम थकाऊ है। 
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रहस्यमय सभ्यता के खंडहर - फोटो : Social media
चाको को क्यों बनाया गया था, इस बारे में पिछले कुछ साल में पुरातत्वविदों ने अनेक सिद्धांत दिए हैं। जॉन गाहेट कहते हैं, 'दक्षिण में आज जिसे हम मेक्सिको कहते हैं वहां से एक व्यापारिक मार्ग था। चाको में कोकोआ के बीज, तोते और मकाओ के पंख, तांबे की घंटियां और समुद्री सीप मिले हैं, जिनका व्यापार वे संभवतः यूरोप के सिल्क रोड की तरह करते थे। इतनी बड़ी सभ्यता को विकसित करने की क्षमता होने का एक अर्थ यह भी है कि आपके पास सभी लोगों को हर दिन खाना खिलाने की क्षमता है। आपके पास पानी का भी कोई स्रोत होना चाहिए, क्योंकि वह इंसान के लिए जरूरी है। इसके साथ किसी एक प्रकार की सामाजिक संरचना भी होनी चाहिए, जिससे एक तरह का स्थायित्व मिले।' 
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रहस्यमय सभ्यता के खंडहर - फोटो : Social media
खगोलशास्त्र की जानकारी

व्यापारिक केंद्र होने पर भी इमारत से संकेत मिलता है कि यह समारोह मनाने की कोई जगह हो सकती है। इमारतों के खंडहर चाकोन लोगों के खगोलीय ज्ञान की ओर भी इशारा करते हैं। प्यूब्लो बोनिटो की दीवारें इक्विनॉक्स पर सूर्योदय की दिशा से मेल खाती हैं और उत्तर दिशा की ओर दरवाजे ठीक उत्तर दिशा में हैं। न्यू मेक्सिको के प्यूब्लो आदिवासी, जैसे जुनी समुदाय के लोग, अब भी चाको दर्रे को पवित्र स्थान समझते हैं और समारोहों के लिए यहां आते हैं। 

जुनी इतिहासकार ऑक्टेवियस सिओतेवा कहते हैं, 'प्यूब्लो समुदाय के सभी लोग- जैसे जुनी, लगुना, एकोमा, होपी, सांतो डोमिंगो वगैरह, ये सभी कभी एक ही थे।' गाहेट कहते हैं, 'जब हम यहां के वातावरण को देखते हैं, खासकर दक्षिण-पश्चिमी रेगिस्तान को तो यहां जीवन और संसाधनों की प्रचुरता है, लेकिन यहां ऐसे दौर भी आए होंगे जब अकाल पड़े होंगे। फसलें बर्बाद हुई होंगी। शायद इसीलिए लोग इस जगह को छोड़कर चले गए होंगे।'  
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पूर्वजों की जगह

सिओतेवा को इस पर एतराज है। वह कहते हैं, 'प्यूब्लो समुदाय के सभी लोग यहां आते हैं। हम यहां अपने पूर्वजों के पास आते हैं। इसलिए यह कहना कि इस जगह को छोड़ दिया गया है सच नहीं है। चाको हम सबके लिए एक अहम जगह है।' 

1987 में यूनेस्को ने चाको सांस्कृतिक राष्ट्रीय एतिहासिक उद्यान और कुछ अन्य छोटे केंद्रों को विश्व धरोहर केंद्र घोषित किया था। पिछले कुछ साल से चाको दर्रे के आसपास तेल और गैस की खुदाई से इन धरोहर केंद्रों को खतरा हो रहा है। 2019 में अमेरिकी सीनेट में चाको कल्चरल हेरिटेज एरिया प्रोटेक्शन एक्ट लाया गया था। अगर यह पास हो जाता है तो यहां से 16 किलोमीटर के दायरे में इस तरह की गतिविधियों पर पाबंदी लगेगी। 
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