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आखिर 'नवाबों के शहर' का नाम लखनऊ कैसे पड़ा? कई कहानियां हैं प्रचलित

Sun, 24 May 2020 10:42 AM IST
सोनू शर्मा फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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लखनऊ की एक खूबसूरत तस्वीर - फोटो : Social media
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के बारे में तो आप जानते ही होंगे, जिसे 'तहजीब का शहर' या 'नवाबों के शहर' के नाम से भी जाना जाता है। हालांकि वर्ष 1850 में अवध के अंतिम नवाब वाजिद अली शाह ने ब्रिटिश अधीनता स्वीकार कर ली, जिसके बाद लखनऊ के नवाबों का शासन हमेशा-हमेशा के लिए समाप्त हो गया। दरअसल, लखनऊ उस क्षेत्र में स्थित है, जिसे एतिहासिक रूप से अवध क्षेत्र के नाम से जाना जाता था। क्या आप जानते हैं कि नवाबों के इस शहर का नाम लखनऊ कैसे पड़ा था? इसके पीछे कई कहानियां प्रचलित हैं, जिसके बारे में आज हम आपको बताने जा रहे हैं। 
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भगवान राम (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Social media
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, अयोध्या के राजा भगवान श्रीराम ने अपने भाई लक्ष्मण को यह क्षेत्र सौंप दिया था। लक्ष्मण ने गोमती नगर के तट पर एक नगर बसाया, जिसे लक्ष्मणावती, लक्ष्मणपुर या लखनपुर के नाम से जाना गया। यही नाम बाद में बदल कर लखनऊ हो गया। लखनऊ शहर की आधिकारिक वेबसाइट lucknow.nic.in पर भी यह बात साफ-साफ लिखी हुई है। नगर के पुराने भाग में एक ऊंचा टीला है, जिसे आज भी 'लक्ष्मण टीला' कहा जाता है। 
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लखनवी पान - फोटो : Social media
लखनऊ अपनी विरासत में मिली संस्कृति को आधुनिक जीवनशैली के संग बड़ी सुंदरता के साथ आज भी संजोये हुए है। यहां के समाज में नवाबों के समय से ही 'पहले आप' वाली शैली समायी हुई है। हालांकि वक्त के साथ अब बहुत कुछ बदल चुका है, लेकिन यहां की एक तिहाई जनसंख्या इस तहजीब को आज भी संभाले हुए है। इसके अलावा लखनवी पान तो यहां की संस्कृति का एक अभिन्न अंग है। इसके बिना तो लखनऊ अधूरा सा लगता है। 
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लखनऊ का घंटा घर - फोटो : Social media
लखनऊ में एक घंटाघर है, जिसे भारत का सबसे ऊंचा घंटाघर माना जाता है। इसके अलावा यहां 19वीं शताब्दी में बनी एक पिक्चर गैलरी भी है। यहां लखनऊ के लगभग सभी नवाबों की तस्वीरें मौजूद हैं।
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