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वो गुमनाम वैज्ञानिक, जो न होता तो द्वितीय विश्वयुद्ध दो साल ज्यादा चलता

Fri, 20 Mar 2020 07:41 PM IST
सोनू शर्मा फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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एलन ट्यूरिंग - फोटो : Social media
अल्बर्ट आइंस्टीन या स्टीफन हॉकिंग जैसे महान वैज्ञानिकों के बारे में तो पूरी दुनिया जानती है, लेकिन इनसे इतर कुछ ऐसे भी वैज्ञानिक रहे हैं, जिन्हें शायद ही सभी लोग जानते हों। एक ऐसे ही वैज्ञानिक थे एलन ट्यूरिंग, जिन्हें आज 'गुमनाम वैज्ञानिक' के तौर पर दुनिया जानती है। कई इतिहासकारों का मानना है कि वो एलन ट्यूरिंग ही थे, जिनकी वजह से द्वितीय विश्वयुद्ध दो साल पहले ही खत्म हो गया था। 
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मैनचेस्टर में एलन ट्यूरिंग का पुतला - फोटो : Social media
23 जून 1912 को लंदन में जन्मे एलन ट्यूरिंग एक कंप्यूटर वैज्ञानिक, गणितज्ञ, तर्कज्ञ, क्रिप्टैनालिस्ट, दार्शनिक और सैद्धांतिक जीवविज्ञानी थे। ट्यूरिंग को व्यापक रूप से सैद्धांतिक कंप्यूटर विज्ञान और कृत्रिम बुद्धि का जनक माना जाता है। अपने 41 साल के छोटे से जीवनकाल में उन्होंने कई ऐसे काम किए थे, जिनकी वजह से लोग आज भी उन्हें याद करते हैं। 
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खुफिया कोड डिकोड करते एलन ट्यूरिंग का पुतला - फोटो : Social media
द्वितीय विश्वयुद्ध के समय एलन ने ही अटलांटिक महासागर में तैनात जर्मन ऊ-बोट (पनडुब्बी) के गुप्त संदेश को डिकोड किया था। कहते हैं कि ऐसा करके उन्होंने यूरोप में युद्ध को लगभग दो साल कम कर दिया था और लाखों लोगों की जान बचाई थी। अनुमान लगाया जाता है कि अगर उन्होंने ऐसा नहीं किया होता तो युद्ध और दो साल ज्यादा चलता और तब शायद दुनिया कुछ और ही होती। 

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एलन ट्यूरिंग - फोटो : Social media
साल 1952 में एलन को अश्लीलता का दोषी करार दिया गया था। कहते हैं कि उन्हें दवा देकर नपुंसक बनाए जाने की सजा सुनाई गई थी। दरअसल, एलन समलैंगिक थे और उस समय ब्रिटेन में समलैंगिकता अपराध माना जाता था। हालांकि उन्होंने जेल जाने के विकल्प के रूप में डीईएस के साथ रासायनिक कृत्रिम उपचार स्वीकार कर लिया था। सात जून 1954 को उनकी मौत हो गई थी। कहते हैं कि उन्होंने सायनाइड की गोली खाकर आत्महत्या कर ली थी। 
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एलन ट्यूरिंग - फोटो : Social media
ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री गॉर्डन ब्राउन ने कुछ साल पहले ये स्वीकार किया था कि ब्रिटेन में एलन के साथ 'भयानक दुर्व्यवहार' किया गया था। इसके लिए उन्होंने आधिकारिक तौर पर सार्वजनिक रूप से माफी भी मांगी थी। इसके बाद साल 2013 में महारानी एलिजाबेथ द्वितीय ने उन्हें मरणोपरांत क्षमादान दे दिया था।
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