फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

20 लाख साल पुरानी वो झील, जहां छिपे हैं इंसानों से जुड़े कई राज

Mon, 16 Dec 2019 05:27 PM IST
सोनू शर्मा फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
1 of 13
तुर्काना झील - फोटो : Social media
दुनिया में तमाम जानवरों की कई-कई प्रजातियां होती हैं। किसी भी जानवर को ले लीजिए, दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में उनकी अलग-अलग प्रजातियां मिलती हैं। लेकिन इंसान के साथ ऐसा नहीं। पूरी दुनिया में इंसानों की एक ही प्रजाति है, 'होमो सैपिएंस'। तमाम जीव-जंतुओं की विकास गाथा जुटाने और लिखने पढ़ने वाले इंसान की खुद के बारे में समझ बहुत कम है। आप भी ये जानकर चौंक जाएंगे कि हमें अपने पुरखों के बारे में बहुत कम जानकारी है। 
विज्ञापन

2 of 13
तुर्काना झील - फोटो : Social media
आज से करीब बीस लाख साल पहले धरती पर पहला इंसान पैदा हुआ था। तब से कुदरत में बहुत से बदलाव हो चुके हैं। इंसान ने इतनी तरक्की कर ली है, मगर खुद अपने पुरखों यानी आदि मानव के बारे में हम बहुत कम जानकारी जुटा सके हैं। वजह ये है कि लाखों साल पहले के इंसानों के कंकाल बहुत कम मिलते हैं। जहां भी मिलते हैं एक-आध टुकड़े, आधी-अधूरी जानकारी। इसके आधार पर कोई ठोस बात कहना वैज्ञानिकों के लिए भी मुश्किल होता है। मगर, 1984 में इंसानों के हाथ अपने पुरखों की जानकारी का एक बड़ा खजाना लगा था। इससे हमें अपने विकास की कहानी को समझने में बहुत मदद मिली। 
विज्ञापन

3 of 13
तुर्काना झील में मिला मानव अवशेष - फोटो : Social media
ये खजाना मिला था, अफ्रीकी देश केन्या की तुर्काना झील में। यहां आठ साल के एक बच्चे का करीब पंद्रह लाख साल पुराना कंकाल मिला था। दुनिया में इंसानों के जितने भी कंकाल मिले हैं, पुराने, उनमें ये पहला ऐसा कंकाल था जो संपूर्ण था। इसे वैज्ञानिकों ने 'तुर्काना ब्वॉय' या तुर्काना झील वाले लड़के का नाम दिया था। हालांकि ये इंसानों के लाखों बरस पहले के पुरखों का कोई पहला कंकाल नहीं था, जो तुर्काना झील में मिला। असल में ये झील, मानव के जानवर से इंसान बनने का पूरा इतिहास संजोए हुए है। 

4 of 13
तुर्काना झील में मिला मानव अवशेष - फोटो : Social media
इस झील से हमें पता चलता है कि लाखों साल पहले के इंसान कैसे रहते थे, क्या खाते थे? कभी हरे-भरे इलाके में पड़ने वाली तुर्काना झील आज बड़े रेगिस्तान के बीच पानी की बूंद जैसी है। वैज्ञानिक कहते हैं कि बीस लाख साल पहले, ये झील बहुत बड़ी थी। तब से इसके आस-पास का माहौल बहुत बदल गया है। हरियाली रेगिस्तान में तब्दील हो चुकी है। झील का दायरा भी बहुत सिमट गया है। मगर, लाखों साल पहले, ये आदि मानव के रहने का आदर्श ठिकाना था। यहां हरियाली थी, खाना आसानी से मिल जाता था और इंसानों को दुश्मनों से छुपने की जगह भी मिल जाती थी। यहां पर आदि मानव के कंकाल मिलने की एक बड़ी वजह है। 
विज्ञापन

5 of 13
तुर्काना झील में मिला मानव अवशेष - फोटो : Social media
ये झील, ज्वालामुखी की गतिविधियों वाले इलाके में पड़ती है। धरती के भीतर की हलचल से, ऊपरी सतह बनती बिगड़ती रहती है। इस वजह से आदि मानवों के कंकाल, भीतरी परतों में छुपकर बचे रह गए। झील के आस-पास इंसान के कंकालों की खोज, केन्या के वैज्ञानिक रिचर्ड लीकी ने 1968 में शुरू की थी। पहली बड़ी कामयाबी उन्हें 1972 में मिली, जब उन्हें होमो रुडोल्फेन्सिस नाम के आदि मानव के सिर का कंकाल मिला। इससे इस दावे को बल मिला कि आज के इंसान किसी एक प्रजाति के सीधे वारिस नहीं। आज के मानवों से पहले, धरती पर आदि मानव की कई प्रजाति थीं। जैसे 'होमो इरेक्टस', 'होमो हैबिलिस', 'पैरेन्थ्रोपस बोइसी'। और अब उसमें होमो रुडोल्फेन्सिस का भी नाम जुड़ गया। हो सकता है कि उस वक्त आदि मानव की और भी नस्लें धरती पर रही हों। इन्हीं में से एक, होमो इरेक्टस से आज के इंसान की नस्ल का विकास हुआ। तुर्काना झील के पास मिला आठ साल के बच्चे के कंकाल ने इस थ्योरी को सही साबित किया है। 
विज्ञापन

6 of 13
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : National Geographic
इंसानों की पहली प्रजाति अफ्रीका में पैदा हुई थी। इन्हीं में से एक होमो इरेक्टस, पहले आदि मानव थे जो अफ्रीका से निकलकर एशिया और यूरोप में फैले। ये आज के इंसानों से काफी मिलते-जुलते थे। जैसे ये सीधे चलते थे। इनका दिमाग, उस वक्त के मानव की दूसरी प्रजाति 'होमो हैबिलिस' से बड़े थे। तुर्काना बच्चे के कंकाल से ये बात भी पता चली कि 'होमो इरेक्टस' चलते वक्त अपने हाथ में कुछ सामान लेकर चल सकते थे। 
विज्ञापन

7 of 13
प्राचीन काल के हथियार - फोटो : Social media
वैज्ञानिक कहते हैं कि अगर आप तेजी से चल सकते हैं। दौड़ते वक्त हाथ में सामान लेकर चल सकते हैं तो बड़ी बात है। अब अगला सवाल है कि ये आदि मानव आखिर हाथ में लेकर चलते क्या थे? वैज्ञानिक मानते हैं कि 'होमो इरेक्टस' आदि मानव, जरूर हाथ में भाले या कुल्हाड़ी लेकर चलते रहे होंगे, क्योंकि वो फेंकना जान गए थे जबकि हमारे दूसरे पुरखे, बंदर, चिंपैंजी या गोरिल्ला, जो पेड़ पर रहते थे, वो हाथ से कुछ फेंकने में नाकाम थे।हाथ से फेंक देने की इस ताकत के बूते, 'होमो इरेक्टस' शिकार करने के उस्ताद हो गए होंगे। इस वजह से उन्हें अपना दायरा बढ़ाने में मदद मिली। उस वक्त धरती पर बड़े बदलाव हो रहे थे। जंगल कम हो रहे थे। घास के मैदान बढ़ रहे थे। ऐसे में जंगली दुश्मनों से बचने में उस वक्त के इंसानों को दिक्कत होती थी। ऐसे में शिकार की कला से वो अपनी जान के दुश्मनों से निपट सकते थे। 

8 of 13
प्राचीन काल की पत्थर की कुल्हाड़ी - फोटो : Social media
वैज्ञानिक मानते हैं कि ऐसे दुश्मनों का होमो इरेक्टस ने डटकर सामना किया होगा। इन्हीं दुश्मनों की वजह से अलग-अलग रहने वाले आदि मानवों को साथ रहने के फायदे भी नजर आए होंगे। वो साथ रहकर शिकार कर सकते थे, दुश्मन का मुकाबला कर सकते थे। ऐसे ही इंसानों के एक दूसरे से जुड़कर कबीले या समुदाय बनाने की सोच पैदा हुई होगी। वैज्ञानिकों को धरती पर कई जगह से पत्थर की बनी कुल्हाड़ियां भी मिली हैं, जो उसी दौर की हैं। तो होमो इरेक्टस, पत्थरों को काट-छांटकर ऐसे हथियार बना भी सकते थे और अपने साथियों को सिखा भी सकते थे। पत्थर की ऐसी पहली कुल्हाड़ियां करीब अठारह लाख साल पुरानी हैं, जो केन्या की तुर्काना झील के पास मिली हैं। माना जाता है कि होमो इरेक्टस ने ही इन्हें बनाया होगा।  

9 of 13
प्राचीन काल की पत्थर की कुल्हाड़ी - फोटो : Social media
वैज्ञानिक मानते हैं कि पहली कुल्हाड़ी के विकास के करीब दस लाख साल बाद तक इंसान ने कोई खास तरक्की नहीं की, क्योंकि पत्थर की इस कुल्हाड़ी से स्विस नाइफ जैसे कई काम लिए जा सकते थे। शिकार करने से लेकर उसे काटने-छांटने तक। हालांकि, उस वक्त के आदि मानवों की कोई जुबान नहीं होती थी। मगर वो इशारों से एक दूसरे से बात कर लेते थे। तभी ऐसी पत्थर की कुल्हाड़ियां बनाने तरीका भी सिखा देते थे। 

10 of 13
तुर्काना झील - फोटो : Social media
केन्या की तुर्काना झील को आदि मानवों के इतिहास का खजाना कहा जाता है। वहां से मिले कुछ और कंकाल, आदि मानवों से पहले के पुरखों के इतिहास पर भी रोशनी डालते हैं। जैसे 1974 में मिला लूसी नाम का कंकाल, जिसे 'ऑस्ट्रेलोपिथेकस अफारेन्सिस' प्रजाति का नाम दिया गया था। ये बंदरों और आदि मानवों के बीच की मिसिंग लिंक थी जो वैज्ञानिकों के हाथ लग गई थी। इस कंकाल के मिलने से पहले ये माना जाता था कि होमो प्रजाति के आदि मानवों से पहले के पुरखे, बंदर या गोरिल्ला जैसे ही रहे होंगे। मगर, लूसी नाम का ये कंकाल मिलने से साफ हो गया कि बंदरों से इंसानों का विकास, लूसी जैसे आदि मानवों के पुरखों के जरिए हुआ था। 

11 of 13
तुर्काना झील - फोटो : Social media
नब्बे के दशक में वैज्ञानिकों की टीम ने तुर्काना झील के आस-पास से लूसी के भी पहले की एक नस्ल की खोज कर डाली। इसे 'ऑस्ट्रेलोपिथेकस एनामेंसिस' नाम दिया गया। कुछ सालों बाद, आदि मानवों के पुरखों की एक और प्रजाति का पता चला। ये सब खोजें, तुर्काना झील के पास खोज करने वाले पहले वैज्ञानिक रिचर्ड लीकी की पत्नी मीव लीकी ने की थीं। इन नए कंकालों की खोज से वैज्ञानिक इस नतीजे पर पहुंचे कि इंसान की आज की प्रजाति का विकास किसी एक प्रजाति के आदि मानव से नहीं हुआ। 

12 of 13
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Facebook/WPTV
आज से करीब तीस लाख साल पहले, धरती पर आदि मानवों से पहले और बंदरों से मिलती जुलती कई प्रजातियां रही होंगी। इन्हीं में से एक विकसित होकर आज के इंसान के तौर पर विकसित हुई। वैसे तुर्काना झील की परतों में छुपा इंसान के विकास का ये खजाना, अब भी लोगों को चौंका रहा है। 2015 में झील के पास, करीब तीस लाख साल पुराने पत्थर के हथियार मिले थे। पहले माना जाता था कि पहले हथियार इंसानों की होमो इरेक्टस नस्ल ने बनाए होंगे। मगर तीस लाख साल पुराने पत्थर के इन हथियारों से साफ हो गया कि उससे पहले के मानवों के पुरखों ने भी कुछ-कुछ कल-पुर्जे बनाने सीख लिए थे।
विज्ञापन

13 of 13
तुर्काना झील - फोटो : Social media
तुर्काना झील इंसान के विकास का केंद्र रही हो, ऐसा नहीं। बस वो उस जगह पर थी, जहां कंकाल सुरक्षित रह गए। इसी वजह से उसकी अहमियत बढ़ गई। अगर वहां कंकाल सुरक्षित नहीं रहते, तो इंसानों को अपनी विकास गाथा समझने में अभी और वक्त लगना था। यही इस झील की सबसे बड़ी अहमियत है।  
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें