पहाड़ों पर आई प्रलय के मौत के पंजे में बिहार के भी हजारों लोग फंसे हुए हैं। संचार सेवा ठप होने की वजह से ज्यादातार लोगों का संपर्क अपने परिजनों से नहीं हो पा रहा है।
उत्तराखंड में जल प्रलय के पांच दिन बाद बिहार सरकार को इसकी याद आई है। सरकार ने अब इस मामले को गंभीरता से लेते हुए 24 घंटे आपदा प्रबंधन विभाग उत्तराखंड के प्रधान सचिव से संपर्क किया है। ताकि लापता लोगों का कोई सुराग लग सके।
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अभी कुछ दिन पहले पूर्व मंत्री अश्र्विनी कुमार चौबे भी अपनी पिता के पिंडदान के लिए वहां गए थे। जहां से उन्हें और उनके परिवार को सुरक्षित तो निकाल लिया गया मगर उनके साथ गए पंडितजी लापता हैं। साथ ही उनके तीन रिश्तेदारों का भी अब तक कुछ पता नहीं चल सका हैं।
सरकारी सिस्टम को जमकर कोस रहे हैं यात्री
बिहार के अलग-अलग जिलों से अभी भी बड़ी तादाद में लोग जहां तहां फंसे हुए हैं। अगर आकड़ों पर नजर डालें तो मुजफ्फरपुर से 200 लोग, गोपालगंज में 42 लोग, समस्तीपुर से 36, सारण के 30 पक्षिम चंपारण से 27, पूर्वी चंपारण से 20, पटना से 40, किशनगंज से 32, दरभंगा से 36, जमुई से 15, खगड़िया से 12 और भागलपुर से उत्तराखंड गए 30 लोगों का कुछ पता नहीं हैं।
इसी तरह सहरसा से लगभग 35 तीर्थयात्रियों को लेकर सात जून को बद्रीनाथ और केदारनाथ के लिए एक बस रवाना हुई थी जिसके बारे में अभी तक कोई सूचना नहीं हैं।
समस्तीपुर और सहरसा समेत राज्य के कई जिलों से चार धाम की यात्रा पर गए तमाम तीर्थ यात्रियों के परिजन अब भगवान से यही दुआ कर रहे हैं कि उनके प्रियजन सही सलामत घर लौट आएं।