बिहार में पूर्ण रूप से शराब बंदी लागू है। लेकिन इसके बावजूद शराब के धंधेबाज यूपी, हरियाणा या पंजाब से शराब की बड़ी-बड़ी खेप को बिहार में लाकर शराब बंदी नियम के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। हालांकि, बिहार पुलिस या उत्पाद विभाग की टीम द्वारा गहन जांच अभियान चलाकर धरपकड़ करते हुए शराब से जुड़े धंधेबाजों को गिरफ्तार के साथ ही शराब की खेप पकड़ने में कामयाब भी होती है।
कुछ वैसे भी मामले सामने आते हैं, जिसमें न्यायालय द्वारा सजा भी सुनाई जाती है। कुछ इसी तरह का मामला व्यवहार न्यायालय छपरा से आई है। जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह उत्पाद विभाग के विशेष न्यायाधीश द्वितीय अतुल वीर सिंह ने सोनपुर थाना कांड संख्या-185/17 के उत्पाद विचारण वाद संख्या-2076/22 में सोनपुर थाना क्षेत्र के दुधैला गांव निवासी संजीव कुमार सिंह को उत्पाद अधिनियम की धारा 30 (a) के अंतर्गत दोषी पाते हुए पांच वर्ष सश्रम करावास और एक लाख रुपये अर्थ दंड नहीं देने पर अतिरिक्त एक वर्ष की सजा सुनाई है।
अभियोजन की ओर से छपरा व्यवहार न्यायालय के वरीय अधिवक्ता सह विशेष लोक अभियोजक सर्वजीत ओझा और उनके सहायक कृति एवं अनिल कुमार पाण्डेय तथा बचाव पक्ष की ओर से मनोज कुमार सिंह ने न्यायालय में अपना-अपना पक्ष रखा। हालांकि, अनुसंधानकर्ता द्वारा 15 अगस्त 2017 को न्यायालय में आरोप पत्र समर्पित किया गया था, जिसके बाद अभियोजन की ओर से इस मामले में कुल चार गवाहों की गवाही न्यायालय में कराई गई।
मालूम हो कि कांड के सूचक सह सोनपुर थाना के पुलिस अवर निरीक्षक मनोज कुमार सिंह को गुप्त सूचना मिली थी। अभियुक्त अपने घर में अंग्रेजी शराब रखकर उसका कारोबार करता है। गुप्त सूचना के आधार पर 16 मई 2017 को सूचक मनोज कुमार सिंह ने पुलिस बल के साथ अभियुक्त के घर पर छापामारी की तो विभिन्न कंपनियों के लगभग 59 लीटर अंग्रेजी शराब बरामद हुआ था।