बिहार में ग्रामीण सड़कों को मजबूत और टिकाऊ बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया जा रहा है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 12 मई (सोमवार) को राजधानी पटना स्थित संकल्प भवन में आयोजित एक भव्य समारोह में 6,938 ग्रामीण पथों के सुदृढ़ीकरण एवं प्रबंधन कार्य का शुभारंभ करेंगे। इन सड़कों की कुल लंबाई 12,105 किलोमीटर है और इस पर लगभग ₹8,716 करोड़ की लागत आएगी।
ग्रामीण सड़क उन्नयन योजना का नया चरण
यह कार्यक्रम मुख्यमंत्री ग्रामीण सड़क उन्नयन योजना के एक नवीन अवयव के रूप में शुरू किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ग्रामीण क्षेत्रों की सड़कों का नियमित पुनर्निर्माण, उन्नयन और नवीनीकरण हो सके, ताकि ग्रामीण जनता को बेहतर और सुरक्षित आवागमन की सुविधा उपलब्ध रहे।
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24,482 किमी सड़कों को मिली प्रशासनिक स्वीकृति
वित्तीय वर्ष 2024-25 में पंचवर्षीय अनुरक्षण अवधि से बाहर हो चुके कुल 14,087 पथों (लंबाई: 24,482 किमी) के लिए ₹21,733 करोड़ की प्रशासनिक स्वीकृति दी जा चुकी है। इसके पहले चरण में 6,938 पथों पर कार्य प्रारंभ किया जा रहा है। शेष पथों पर भी अगले चरणों में क्रियान्वयन की प्रक्रिया तेज़ी से आगे बढ़ेगी।
सात वर्षों तक मिलेगी मानक अनुरक्षण सेवा
इस योजना के तहत सड़कों को अगले सात वर्षों तक तय मानकों के अनुरूप बनाए रखने की जिम्मेदारी सुनिश्चित की गई है। इस अवधि में प्रत्येक पथ पर दो बार कालीकरण (री-सर्फेसिंग) किया जाएगा। अगर किसी मार्ग में तकनीकी त्रुटि पाई जाती है तो उसे निर्धारित समय-सीमा में अनिवार्य रूप से दूर किया जाएगा।
सड़क सुविधा से जुड़ेगा सामाजिक और आर्थिक विकास
सरकार का मानना है कि इस कार्यक्रम से न केवल गांव और शहरों के बीच की दूरी कम होगी, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में सामाजिक संरचना सुदृढ़ होगी और आर्थिक गतिविधियों को नया बल मिलेगा। खासकर किसान, मजदूर और ग्रामीण उद्यमियों को बेहतर कनेक्टिविटी का लाभ मिलेगा, जिससे उनके उत्पाद और सेवाएं बेहतर बाजार तक पहुंच सकेंगी।
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सीएम के चार घंटे में राजधानी पहुंचने के विजन को मिलेगा बल
इस पहल के जरिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के उस महत्त्वाकांक्षी विजन को साकार करने की दिशा में बड़ी प्रगति होगी, जिसमें राज्य के किसी भी सुदूरवर्ती कोने से राजधानी पटना तक की यात्रा चार घंटे के भीतर संभव हो सके। यह कदम न केवल भौगोलिक दूरी कम करेगा, बल्कि विकास और अवसरों की दूरी को भी समाप्त करेगा।