बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल (यूनाइटेड) ने गुरुवार को स्पष्ट किया कि वह उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव भाजपा के साथ मिलकर लड़ना पसंद करेगी, लेकिन ऐसा नहीं होने पर वह अपने बुते चुनावी समर में उतरने से नहीं कतराएगी।
जेडीयू संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के संबंध में अपनी पार्टी की रणनीति पर पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए कहा, ‘निस्संदेह हम वहां लड़ने जा रहे हैं। बेशक हम भाजपा के साथ गठबंधन करना पसंद करेंगे। लेकिन, अगर ऐसा नहीं होता है, तो हम अकेले चुनाव लड़ने का विकल्प चुन सकते हैं।’
बिहार में सत्तारूढ़ गठबंधन में भागीदार भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) उत्तरप्रदेश में सत्ता में है और यहां उसने पांच साल पहले विधानसभा चुनाव में शानदार जीत हासिल की थी। पार्टी ने 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव में भी शानदार प्रदर्शन किया था।
हालांकि जेडीयू बिहार और राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा का सहयोगी है लेकिन अन्य राज्यों में इनका गठबंधन नहीं हो पाया है। जेडीयू ने गुजरात में भाजपा के खिलाफ चुनाव लड़ा था। जेडीयू ने अरुणाचल प्रदेश में कुछ सफलता हासिल कर मुख्य विपक्षी दल की भूमिका में वहां आई थी, लेकिन सत्ता में आई भाजपा ने हाल ही में पूर्वोत्तर राज्य में जेडीयू के कई विधायकों को अपने दल में शामिल कर लिया।
अगले महीने बिहार की दो विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव में जेडीयू की संभावनाओं के बारे में पूछे जाने पर कुशवाहा ने कहा, ‘हमें किसी चुनौती का सामना नहीं करना पड़ता है। कुशेश्वर स्थान और तारापुर दोनों ही हमारी सीटें थीं और वहां के विधायकों के दुखद निधन पर खाली हो गईं। हमारी जीत निश्चित है। हम केवल यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहे हैं कि जीत का अंतर बड़ा हो।’
यूपी में, जेडीयू ने पहले भी कई दलों के साथ गठबंधन के लिए प्रयोग किया था, जिसमें एक अपना दल के साथ भी शामिल है, उस समय इस पार्टी का नेतृत्व इसके संस्थापक सोन लाल पटेल कर रहे थे, जिनकी बेटी अनुप्रिया अब इसका नेतृत्व करती हैं और केंद्र में नरेंद्र मोदी सरकार में मंत्री हैं।
कुशवाहा से सतत विकास लक्ष्यों पर नीति आयोग की रिपोर्ट में बिहार की खराब रैंकिंग के बारे में जब पूछा गया तो उन्होंने कहा कि नए सिरे से काम करने और शासन को मजबूती देने के लिए राज्य को विशेष प्रोत्साहन की आवश्यकता है। कुशवाहा ने केंद्र सरकार द्वारा विशेष राज्य का दर्जा देने की जेडीयू की लगातार मांगों का जिक्र करते हुए कहा, 'वास्तव में, बिहार को विशेष सहायता की आवश्यकता है। केंद्र को वह अनुदान देना चाहिए। वह इसे जो भी नाम देना चाहे, दे सकते हैं।'