राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने प्रतिबंधित संगठन द्वारा बिहार के मगध क्षेत्र में अपनी गतिविधियों को फिर से शुरू करने की कोशिश करने के एक मामले में एक पोलित ब्यूरो सदस्य सहित दो सीपीआई (माओवादी) कार्यकर्ताओं के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया है। एक अधिकारी ने रविवार को यह जानकारी दी।
संघीय एजेंसी के प्रवक्ता ने बताया कि औरंगाबाद जिले के प्रमुख पोलित ब्यूरो सदस्य प्रमोद मिश्रा उर्फ सोहन दा और गया के उनके सहयोगी अनिल यादव उर्फ अंकुश के खिलाफ पटना में एनआईए की विशेष अदालत में पूरक आरोप पत्र दायर किया गया था। दरअसल, एनआईए ने दो फरवरी को मामले में दो अन्य लोगों के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया था। अधिकारी ने कहा कि मिश्रा को वनबिहारीजी, डॉक्टर साब, जनार्दन, दादा और बाबा जी के नाम से भी जाना जाता है। मिश्रा समेत यादव पर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं।
एनआईए के मुताबिक, दोनों के खिलाफ आईपीसी, विस्फोटक पदार्थ अधिनियम, शस्त्र अधिनियम और यूएपीए की धाराओं के तहत आपराधिक मामले दर्ज हैं। प्रवक्ता ने बताया कि मिश्रा के खिलाफ औरंगाबाद और गया के विभिन्न पुलिस स्टेशनों में 39 मामले दर्ज हैं। इसके अलावा झारखंड में छह और कैमूर क्षेत्र में दो मामले दर्ज हैं। यादव के खिलाफ औरंगाबाद और गया जिलों के विभिन्न पुलिस स्टेशनों में छह मामले दर्ज हैं।
इसके साथ ही अधिकारी ने बताया कि जांच से पता चला है कि मिश्रा माओवादी विचारधारा के प्रचार और प्रसार में शामिल था। उसके लिए वह अपने क्षेत्र में कैडरों की भर्ती भी कर रहा था। प्रवक्ता ने कहा कि वह फंड भी जुटा रहा था और पुराने नक्सली कैडरों की बैठकें भी आयोजित कर रहा था। उन्होंने बताया कि सब-जोनल कमेटी का सदस्य और संगठन का सक्रिय कैडर यादव ईंट भट्ठा मालिकों और ठेकेदारों से लेवी वसूल कर फंड जुटाने में शामिल था।
जानकारी के मुताबिक, मामले की जांच एनआईए ने पिछले साल 26 सितंबर को शुरू की थी। उसमें एजेंसी ने पाया कि इन दोनों आरोपियों ने रोहित राय, प्रमोद यादव और अन्य के साथ मिलकर पिछले साल आठ जून को औरंगाबाद के माही गांव में एक बैठक की थी।
प्रवक्ता ने आगे बताया कि बैठक का उद्देश्य मगध क्षेत्र में संगठन को दोबारा सक्रिय करना और सीपीआई (माओवादी) गतिविधियों को मजबूत करने के लिए व्यावसायिक प्रतिष्ठानों, ठेकेदारों, टोल प्लाजा और ऐसी अन्य संस्थाओं से लेवी की वसूली करना था।
अधिकारी के अनुसार, मिश्रा के निर्देशों के तहत शेष तीन आरोपी और अन्य अपने गैरकानूनी और नापाक योजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए अवैध और हिंसक गतिविधियों को अंजाम देने के लिए और अधिक कैडरों को प्रेरित करने और भर्ती करने में लगे हुए थे। प्रवक्ता ने कहा कि वे सक्रिय रूप से संगठन की विचारधारा को बढ़ावा दे रहे थे। साथ ही शांति और सार्वजनिक व्यवस्था को बाधित करने के इरादे से गैरकानूनी गतिविधियों को अंजाम दे रहे थे।