लोकसभा चुनाव सिर पर हैं और इन दिनों भाजपा की मौज आ गई है। लोकसभा सीट और जीत की उम्मीद लिए, जो नेता यहां-वहां से टूट रहे हैं, वो सभी उसके पाले में जा रहे हैं।
शुक्रवार का दिन भी कुछ ऐसा ही रहा। सवेरे उत्तराखंड से आने वाले कांग्रेस के नेता सतपाल महाराज ने भगवा दल का साथ पकड़ा और शाम को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को झटका लगा।
नीतीश के साथी एन के सिंह ने जेडी यू का साथ छोड़ मोदी बिग्रेड में शामिल होने का फैसला लगभग कर लिया है। 73 वर्षीय सिंह ने शुक्रवार को संवाददाताओं को बताया कि जब से नीतीश कुमार ने भाजपा के साथ गठबंधन तोड़ा, तब से प्रदेश में प्रशासन और विकास पर बेहद बुरा असर हुआ है।
भाजपा में होंगे शामिल?
ओपिनियन पोल की मानें, तो भाजपा से गठबंधन तोड़ने के बाद जनता दल युनाइटेड को लोकसभा चुनाव में कुछ मुश्किलें पेश आ सकती हैं।
इस बार नीतीश को कुल 40 सीटों में से पांच सीटें मिलने की उम्मीद है, जबकि पिछले चुनाव में उसे 20 सीट मिली थीं। गठबंधन सहयोगी भाजपा के खाते में तब 12 सीटें गई थीं।
एन के सिंह 2008 में जद यू में शामिल हुए थे। उनकी गिनती देश के जाने-माने नौकरशाहों में होती है। इसके पहले वह राजस्व सचिव, योजना आयोग के सदस्य और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के सचिव के रूप में काम कर चुके हैं।
नहीं पट रही थी नीतीश से
दो महीने पहले बिहार के सीएम नीतीश ने सिंह का नाम राज्यसभा के लिए दोबारा आगे नहीं बढ़ाते हुए उन्हें बांका लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ने को कहा था। हालांकि सिंह ने यह प्रस्ताव ठुकरा दिया था।
उनका भाजपा में जाना नीतीश के लिए झटका है। पिछले साल भाजपा से जद यू के रिश्ते खत्म होने से पहले सिंह ने नीतीश से लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी का समर्थन करने को कहा था, लेकिन नितीश ने 2002 का गुजरात दंगे का हवाला देते हुए विरोध किया था। और बाद में भाजपा से गठबंधन तोड़ने का फैसला किया।