चारा घोटाले में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू यादव तो फंस ही चुके हैं लेकिन अब इस घोटाले का खतरा वर्तमान सीएम नीतीश कुमार पर भी मंडराने लगा है।
नीतीश कुमार पर 1995 में हुए बिहार विधानसभा चुनाव के लिए 1.40 करोड़ रुपए लेने का आरोप है। मामले में एक मुख्य आरोपी रहे श्याम बिहारी सिन्हा ने सीबीआई के समक्ष यह आरोप लगाया था।
पशुपालन विभाग के अधिकारी रहे सिन्हा का देहांत हो चुका है। सिन्हा ने सीबीआई को दिए अपने बयान में कहा था कि दिल्ली के एक होटल में 1.40 करोड़ रुपए नीतीश को दिए गए थे।
इसके अलावा, 40 करोड़ रुपए पार्टी के प्रवक्ता शिवानंद तिवारी को मिले थे। मुंगेर से सांसद राजीप रंजन लल्लन को भी नकद दिया गया था।
एक जनहित याचिका पर 20 सितंबर को सुनवाई करते हुए झारखंड हाइकोर्ट ने इस संबंध में सीबीआई से 22 नवंबर को जवाब देने का आदेश दिया है।
राजद के लिए बन गया मौकाराष्ट्रीय जनता दल ने इस मौके को भुनाने की ठान ली है। लालू यादव की पत्नी राबड़ी देवी ने शुक्रवार को कहा कि वह उम्मीद करती हैं कि सीबीआई नीतीश कुमार के मामले में भी निष्पक्ष जांच करेगी।
राजद अध्यक्ष राम कृपाल यादव का कहना है कि पार्टी इंतजार करेगी की न्यायपालिका इस मामले को कैसे निपटाती है।
याचिकाकर्ता मिथिलेश कुमार सिंह ने आरटीआई के जरिए सीबीआई से प्राप्त देस्तावेजों से यह जानकारी हासिल की है। उन्होंने बताया कि पैसे मिलने के बाद नीतीश ने सिन्हा को धन्यवाद देने के लिए फोन भी किया था।
सिंह की याचिका दिसंबर 2012 में सीबीआई की कोर्ट ने खारिज कर दी थी। सीबीआई ने दलील दी थी कि मामले के इस स्तर पर नीतीश कुमार को आरोपियों में जोड़ना नामुमकिन है।