बिहार सरकार ने एक औषधीय पौधे को इस महीने के अंत में चेन्नई में आयोजित होने वाले जैव विविधता प्रदर्शनी में प्रदर्शित करने का फैसला किया है। स्थानीय लोग इस पौधे को 'संजीवनी बूटी' के समान मानते हैं, जिसने रामायाण में लक्ष्मण का जीवन बचाया था।
बिहार सरकार ने केंद्र सरकार के तहत आने वाले स्वायत्त संस्थान बीएसआईपी से सीतामढ़ी जिले के पंथ-पाकड़ गांव में स्थित 'पाकड़' के पेड़ और मुंगेर जिला के एक प्रमुख निजी कंपनी के परिसर के अंदर एक विशाल बरगद के पेड़ की उम्र निर्धारित करने का भी आग्रह किया है।
पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव दीपक कुमार सिंह ने बताया, "हमने बीएसआईपी से इन दो पेड़ों की उम्र निर्धारित करने का अनुरोध किया है क्योंकि ऐसा माना जाता है कि ये पेड़ बहुत प्राचीन हैं।" उन्होंने कहा कि इन दोनों पेड़ों की सुरक्षा के लिए सभी प्रबंध किए गए हैं।
मुजफ्फरपुर रेंज (जिसमें सीतामढ़ी जिला भी शामिल है) के वन संरक्षक सुधीर कुमार कर्ण ने कहा, "लोककथाओं के अनुसार, पंथ-पाकड़ गांव का विशाल पाकड़ पेड़ वही पेड़ है जिसके नीचे देवी सीता ने अपनी शादी के बाद अयोध्या की ओर जाते समय विश्राम किया था।" कर्ण ने कहा कि पूरे मिथिला क्षेत्र, जिसमें बिहार, झारखंड और नेपाल के पूर्वी तराई जिले शामिल हैं, के लोग यहां पूजा करने आते हैं।