बीमा राशि ग्रहण करती पीड़िता रेखा
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बिहार के मुजफ्फरपुर जिला उपभोक्ता आयोग के सख्त आदेश के बाद आखिरकार बीमा कंपनी एल.आई.सी. ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए पीड़िता को पांच लाख रुपये का भुगतान किया है। पूरा मामला जिले के सदर थाना क्षेत्र इलाके का है। जहां बीबीगंज के आनंदपुरी मोहल्ला निवासी रेखा कुमारी ने दो जनवरी 2023 को मानवाधिकार अधिवक्ता एसके झा के द्वारा जिला उपभोक्ता आयोग में परिवाद दर्ज कराया था।
इसमें बताया गया था कि पीड़िता के पति अविनाश कुमार अक्टूबर 2008 से एल.आई.सी. के मोतिहारी शाखा के एजेंट थे। लेकिन 12 दिसंबर 2016 को उनकी मृत्यु हो गई। मृत्यु के बाद से ही पीड़िता बीमा क्लेम की राशि पाने के लिए LIC के कार्यालयों का चक्कर लगा-लगा कर परेशान हो रही थी। लेकिन उसे एल.आई.सी. द्वारा भुगतान नहीं किया जा रहा था।
जानकारी के मुताबिक, दफ्तरों के चक्कर लगा कर थक-हार कर पीड़िता ने मानवाधिकार अधिवक्ता एसके झा के माध्यम से जिला उपभोक्ता आयोग के समक्ष परिवाद दर्ज कराया था। उसमें एल.आई.सी. के तीन अधिकारियों को विरोधी पक्षकार बनाया गया था। उसके बाद सुनवाई करीब एक साल चली, जिसमें आयोग द्वारा दोनों पक्षों को सुनने के बाद एल.आई.सी. को यह आदेश दिया गया कि वह पीड़िता रेखा कुमारी को बीमा क्लेम की राशि का अविलंब भुगतान करे।
आयोग के आदेश के बाद, LIC बीमा कंपनी ने अपने एक अधिवक्ता के माध्यम से आयोग के समक्ष उपस्थित होकर तब अपनी गलती स्वीकार की। फिर आयोग से अपनी भूल के लिए माफी मांगते हुए बीमा क्लेम की राशि कुल पांच लाख रुपये का भुगतान पीड़िता को कर दिया।
मामले में मानवाधिकार अधिवक्ता एसके झा ने कहा कि यह जीत न सिर्फ एक व्यक्ति की जीत है, बल्कि यह न्याय और उपभोक्ता विधि की जीत है। यह हर उस उपभोक्ता की जीत है, अब जो बीमा कंपनियों की मनमानी से परेशान हो चुका है। यह जीत भविष्य में ऐसे अनगिनत मामलों के लिए न्याय की राह दिखाएगी।