लोकसभा चुनाव के मद्देनजर अमर उजाला का चुनावी रथ 'सत्ता का संग्राम' शनिवार को बिहार के शिवहर लोकसभा क्षेत्र में पहुंचा। यहां सुबह चाय पर चर्चा में आम मतदाताओं के मुद्दे जाने गए। दोपहर में युवाओं से चर्चा में उनके मुद्दों पर चर्चा की गई। वहीं, अब जनता के मुद्दों पर नेताओं के दावे और वादों पर चर्चा हो रही है।
शिवहर के किसान मैदान में अमर उजाला से बातचीत करते हुए एनडीए नेता ने कहा कि लोकल स्तर पर शिवहर का विकास हुआ है। उन्होंने कहा कि यह सभी जानते हैं कि 2005 से पहले शिवहर एक टापू हुआ करता था। यहां दहशत की वजह से शाम चार बजे के बाद लोग कहीं आने-जाने की हिम्मत नहीं कर पाते थे। 2005 से पहले का जो दिन-रात होता था, वह 12 घंटे का हो गया था। यानी सूर्योदय से दिन शुरू होता था और सूर्यास्त के साथ खत्म हो जाता था। लेकिन अब वह तो मुद्दा रहा नहीं। 2005 के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एनडीए गठबंधन के साथ यहां बहुत विकास किया। उन्होंने कहा कि इसकी तुलना ऐसे कर सकते हैं कि 2005 से पहले डिब्बी और लालटेन जलाया करते थे, लेकिन आज बिजली की लाइट और सोलर लाइट जलाते हैं। विकास की चकाचौंध इसी से मालूम होती है।
उन्होंने कहा कि इंफ्रास्ट्रक्चर की बात करें तो शिवहर एक टापू था और टापू से उसे शहर या जिले में बदलने के लिए काफी यहां काम हुआ। काम के नाम पर यहां डिग्री कॉलेज, पॉलीटेक्निक कॉलेज, एएनएम कॉलेज, जीएनएम कॉलेज और इंजीनियरिंग कॉलेज है। उसके बाद बहुत सारी बिल्डिंग और थाने बने हैं। नए-नए भवन बने हैं। स्कूल खुले हैं। शिक्षक की भर्ती-बहाली हुई है।
वहीं, विपक्ष इंडिया गठबंधन के नेता ने कहा कि सबसे पहले जिस धरती से हम आते हैं उसका मुद्दा महत्वपूर्ण है, शिवहर का मुद्दा महत्वपूर्ण है। आखिर शिवहर का विकास कैसे होगा? एनडीए नेता के जवाब पर उन्होंने कहा कि हमारे सहयोगी बता रहे थे कि पुल बन गया, रोड बन गया पटना से आने में। बार-बार हम पटना की चर्चा क्यों करते हैं। हम डुमरी कड़सरी से आने की चर्चा क्यों नहीं करते, हम कभी ये कुमागांव से आने की चर्चा क्यों नहीं करते हैं। रामबन गांव की चर्चा क्यों नहीं करते। ये लोग इन तमाम चीजों को झुठला देते हैं। एक रोड बना, तो उसी की चर्चा 2005 से लेकर बार-बार अभी तक ढो रहे हैं। 2005 में एक रोड बना उस पर हम कितनी बार वोट करेंगे। क्या हम हर बार उसी पर वोट करेंगे या रोजगार पर वोट करेंगे। या शिवहर के विकास या रामबन पर भी कभी वोट कर लें। इन लोगों का काम है कि ये तमाम मुद्दे रखेंगे कि ये चार काम हुए हैं उन्हीं चार कामों पर वोट मांगने का काम करेंगे। लेकिन इस बार शिवहर ने परिवर्तन का मन बना लिया है।