लोकसभा चुनाव 2024 के मद्देनजर अमर उजाला का चुनावी रथ 'सत्ता का संग्राम' रविवार को बिहार के सुपौल लोकसभा क्षेत्र में पहुंचा। यहां सुबह चाय पर चर्चा में आम मतदाताओं के मुद्दे जाने गए। वहीं, अब दोपहर में युवाओं से चर्चा में उनके मुद्दे समझने की कोशिश कर रहे हैं। जहां युवा फंतासी और हकीकत के बीच के अंतर को साफ कर रहे हैं।
'रोजगार से पहले सबसे जरूरी चीज ठीक हो रही है'
सुपौल के लोहियानगर चौक पर अमर उजाला से बातचीत में ऋषभ कुमार ने कहा कि यहां रोजगार के लिए साधन उपलब्ध हो रहे हैं। यहां से विधायक विजेंद्र प्रसाद यादव सरकार में मंत्री हैं, वह बहुत अच्छे काम कर रहे हैं। यहां पर एशिया का सबसे बड़ा पुल बन रहा है और ओवरब्रिज बन रहा है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जी ने रोजगार दिया है, जिसमें शिक्षक बहाली और बहुत सारी बहाली हुई हैं। साथ प्राइवेट सेक्टर में फैक्टरियां लाई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि रोजगार लाने से पहले सबसे जरूरी चीज बिजली और सड़क पर काम हो रहा है, ठीक हो रहा है। धीरे-धीरे रोजगार भी लाएगा।
'हम पिछड़ा राज्य हैं, संसाधन की कमी है'
साथ ही ऋषभ ने कहा कि बिहार है ये, क्या कीजिएगा। बिहार में थोड़ा बहुत कमी है। हम लोग को संसाधन की भी कमी है। हमारा कोई इन्वेस्टमेंट वाला बड़ा राज्य नहीं है। हमारी पिछड़े राज्य में गिनती होती है और आते भी हैं। झारखंड का बंटवारा हो जाने के बाद उसमें बहुत सारा खनन का क्षेत्र और खनिज संपदा हमारे पास से चली गई। हमारे बिहार में बच गई सिर्फ बाढ़। लेकिन हमारे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार रोजगार के मुद्दे पर अगले चुनाव में प्रयास किया जाएगा।
'सड़क विकास का मापदंड है तो सुपौल का विकास हुआ है'
वहीं, मुन्ना चमन ने बताया कि हमारी पचास साल की उम्र है। मुझे लगता है कि जहां से मैं चला था, आज भी वहीं पर हूं। एक फ्लाईओवर को बनने में पांच साल लगते हैं, लोग परेशान होकर धूल फांकते हैं। जिस एशिया के सबसे बड़े पुल बनने की बात की जा रही है, वह बन तो रहा है लेकिन गिर भी रहा है। लोग उसमें दबकर मर रहे हैं। मैं किसी पार्टी का नहीं हूं, लेकिन सच्चाई ये है कि विकास के नाम पर यहां के राजनेता ढोंग करते हैं। उन्होंने बताया कि मेरे गांव का एक मजदूर है महादलित जाति का। उसको नशा खिलाने वाले गिरोह ने नशा खिलाकर सहरसा स्टेशन पर पटक दिया है। उसका बाप मेरे घर पर रो-चिल्ला रहा है, अभी मेरे पास फोन आया है। तो सही मायने में यही तो विकास है। सिर्फ सड़कें ही विकास की मापदंड हैं तो सुपौल का विकास हुआ है। शिक्षा, रोजगार और किसानों की बदहाली जब तक दूर नहीं की जाती है तब तक किसको विकास कहते हैं ये मेरी समझ के बाहर की बात है।
'अच्छे दिन के बजाय बुरे दिन आ रहे हैं भाई'
उन्होंने कहा कि कोई भी सरकार आई, आज कहते हैं कि पंद्रह साल लालू यादव रहे, आप भी तो अट्ठारह साल से हैं जनाब। मोदी जी भी दस साल से हैं। क्या अच्छे दिन आएंगे, बुरे दिन आ रहे हैं भाई। चार सौ-साढ़े चार सौ रुपये सिलेंडर था, आज बारह सौ रुपये में खरीदना पड़ता है। मैं समाजसेवी आदमी बेरोजगार हूं, कभी-कभी बाल-बच्चों को सिलेंडर का पैसा नहीं दे पाता हूं। चार सौ रुपये से दस साल में 12 सौ रुपये हो गया है। आप (सरकार) कहते हैं कि हमने उज्ज्वला योजना के तहत सिलेंडर दे दिया है गृहिणी को। अरे जाकर देखिए महादलित के घर में उज्ज्वला वाला सिलेंडर कहां पर है, सब बेच लिया है। उनके पास गैस भरवाने के लिए साढ़े बारह सौ रुपया नहीं है।