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Election 2024 : चुनाव के दिन छुट्टी मनाने वाले देखते रह जाएंगे यह तस्वीरें; बिहार में खतरों से जूझते हुए मतदान

Fri, 10 May 2024 04:17 PM IST
कृष्ण बल्लभ नारायण न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, खगड़िया

सार

Bihar : लोकसभा चुनाव के तीसरे चरण के चुनाव में करीब 1400 मतदाताओं ने वोट का बहिष्कार किया था। उनका कहना है कि आजादी के 75 साल गुजर गये फिर भी हमें शहर और प्रखंड जाने के लिए क्यों नाव का सहारा लेना पड़ता है? अब उनके सवाल को सुनकर हर कोई खामोश हैं।
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मतदान करने जा रही नाव पर सवार महिलाएं - फोटो : अमर उजाला डिजिटल
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विस्तार
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लोकसभा चुनाव को लेकर शुक्रवार 10 मई को खगड़िया के दो मतदान केन्द्रों पर दुबारा वोटिंग की कराई जा रही है, जहां करीब 1400 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। लेकिन इस वोटिंग प्रक्रिया के बीच एक गांव ऐसा भी है, जहां करीब 300 की आबादी जान हथेली पर रखकर मतदान करने पहुंच रही है। इस क्षेत्र के लोगों का कहना है कि आजादी के बाद से ऐसे गांवों में मूलभूत सुविधा आखिर क्यों नहीं पहुंच सकी? इनका कहना है कि वे लोग खुद को बेलदौर प्रखंड मुख्यालय और खगड़िया जिला मुख्यालय से अपने आप को अलग समझते हैं। क्योंकि इन दोनों जगह जाने के लिए उनके पास नाव के अलावे दूसरा कोई साधन नहीं है। लोकसभा चुनाव के तीसरे चरण, यानि 7 मई को खगड़िया के मतदान केंद्र संख्या 182 और 183 पर मतदान नहीं हो पाया था। इसलिए शुक्रवार को इन दोनों केन्द्रों पर पुनः मतदान कराए जा रहे हैं।

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नाव पर सवार होकर मतदान करने जाते लोग - फोटो : अमर उजाला डिजिटल
नाव से आवागमन दिनचर्या का अहम हिस्सा
शुक्रवार को मतदान करने पहुंचे बेलदौर प्रखंड स्थित पौरा पंचायत अंतर्गत प्रयागी गांव के लोगों ने अमर उजाला से अपनी आपबीती सुनाई। लोगों ने बताया कि वे लोग शुरुआत से ही अपने पंचायत से कटे हुए हैं। किसी भी काम को लेकर प्रखंड मुख्यालय अथवा जिला मुख्यालय जाने के लिए वे लोग नाव से आवागमन के लिए मजबूर हैं। उनका कहना है कि चाहे पंचायत चुनाव हो या लोकसभा या फिर विधानसभा, सभी चुनाव में उनके गांव के लोग नदी के उस पार स्थित मध्य विद्यालय सहरौन जाते हैं। लोगों का कहना है कि अब नाव उनके दिनचर्या का एक अहम हिस्सा हो गया है।
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जान- जोखिम में डालकर मतदान करने जाती महिलाएं - फोटो : अमर उजाला डिजिटल
नेताओं ने सिर्फ ठगा, मिला सिर्फ कोरा आश्वासन
शुक्रवार को मतदान केंद्र पर मौजूद प्रयागी गांव की महिलाओं का कहना है कि, चुनाव आते ही वोट की चाह में नेता उनके गांव तो पहुंच जाते हैं। लेकिन उनके द्वारा उनकी समस्या का कोई निराकरण नहीं किया जाता है। महिलाओं का कहना है कि आज तक नेताओं ने उनको सिर्फ ठगा है। उन लोगों की सुविधाओं के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाये गये। बहरहाल वोट बहिष्कार की घोषणा के बाद जिला प्रशासन ने किसी तरह दोबारा वोटिंग के लिए इन ग्रामीणों को मना तो लिया है। लेकिन उनकी परेशानियों को लेकर राजनेता या जिला प्रशासन को भी ठोस कदम उठाने चाहिए।
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