जातीय आधारित जनगणना कराने को लेकर बिहार आगे बढ़ रहा है। सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों इस मुद्दे पर साथ-साथ हैं। राज्य सरकार ने केंद्र को पत्र लिखकर जनगणना की मांग की है। मुख्यमंत्री नीतीश ने कहा कि इसको लेकर एक प्रतिनिधिमंडल जल्द ही प्रधानमंत्री से मिलेगा।
जातीय आधारित जनगणना को लेकर जनता दल यूनाइटेड के सांसद सुनील कुमार पिंटू ने बड़ा बयान दिया है। सीतामढ़ी से सांसद जदयू सांसद पिंटू ने कहा कि अगर मोदी सरकार जातीय आधारित जनगणना कराने को तैयार हो जाती है तो ठीक है नहीं तो मुख्यमंत्री नीतीश कुमार खुद ही जनगणना शुरू करवाएंगे। जदयू सांसद ने कहा कि यह फैसला बिहार के मुख्यमंत्री का है कि प्रदेश में जातीय आधारित जनगणना जल्द शुरू करवाई जाएगी।
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सांसद ने आगे बताया कि अगर भारत सरकार इसको लेकर तैयार हो जाती है और राज्यों को जनगणना कराने के अधिकार देने का विधेयक लेकर आती है तो यह बहुत ही अच्छी बात है, नहीं तो बिहार सरकार अपने स्तर से जातीय आधारित जनगणना कराने की तैयारी में है। बता दें कि गुरुवार को नीतीश कुमार ने बताया कि उन्होंने प्रधानमंत्री को पत्र भेज दिया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि हमारी पार्टी के सांसदों ने जातीय आधारित जनगणना कराने के लिए लिखकर दिया है और गृहमंत्री अमित शाह से बात की है। मुख्यमंत्री नीतीश ने आगे कहा कि जातीय आधारित जनगणना के लिए एक प्रतिनिधिमंडल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलेगा।
जातीय आधारित जनगणना पर सरकार और विपक्ष साथ-साथ
बता दें कि 30 जुलाई को तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मुलाकात कर जातीय आधारित जनगणना कराने की मांग की थी। तेजस्वी ने नीतीश कुमार से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलकर इस पर बात करने का आग्रह किया था। तेजस्वी ने कहा था कि केंद्र अगर तैयार नहीं है तो कर्नाटक की तर्ज पर बिहार सरकार खुद इसकी पहल करे और सूबे में जातीय आधारित गिनती का कार्य शुरू करें।