मेला क्षेत्र में पटाखे जलाने पर रोक
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पितृ दीपावली की मान्यता
पितृपक्ष के 14वें दिन त्रयोदशी तिथि की शाम को गया के फल्गु नदी के देवघाट पर पितृ दीपावली मनाई जाती है। मान्यता है कि इस अवसर पर दीप जलाने से पितरों को स्वर्ग का मार्ग प्रकाशमय हो जाता है। श्रद्धालु अपने पूर्वजों के नाम से घी के दीप जलाते हैं, जिसमें कुछ लोग 500 से 1000 तक दीये जलाकर अपने पितरों के उद्धार की कामना करते हैं।
पितृपक्ष मेला और सुरक्षा
17 सितंबर से शुरू हुआ पितृपक्ष मेला दो अक्तूबर तक चलेगा, जिसमें लाखों तीर्थयात्री शामिल हो रहे हैं। पिंडदान, तर्पण, श्राद्ध और अन्य धार्मिक अनुष्ठानों के माध्यम से पितरों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की जा रही है।