बिहार के मधेपुरा जिला मुख्यालय में दुर्गा पूजा के अवसर पर चार जगहों पर मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित की जाती है। साथ ही भव्य रूप से मेले का भी आयोजन किया जाता है। शहर के बड़ी दुर्गा मंदिर, बंगाली दुर्गा मंदिर, रेलवे दुर्गा मंदिर और गौशाला दुर्गा मंदिर में भव्य रूप से मेले का आयोजन किया जाता है। खासकर बड़ी दुर्गा मंदिर और बंगाली दुर्गा मंदिर अपने पंडालों को लेकर चर्चा में बना रहता है। लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा रेलवे दुर्गा मंदिर में रावण दहन को लेकर होती है। जो आकर्षण का केंद्र हमेशा से रहा है।
बड़ी दुर्गा मंदिर के पट भी खोले गए
देखने को मिलती है बंगाल की परंपरा
कमेटी के वर्तमान मेला व्यवस्थापक अशोक कुमार यादव ने बताया कि यहां बंगाली परंपरा के अनुसार, नवरात्रि की पूजा की जाती है। यहां की पूजा बंगाल के बर्दवान से आए पुरोहितों के द्वारा की जाती है। इस मंदिर की विशेषता है कि सप्तमी और नवमी के दिन मां स्वयं उपस्थित रहती हैं। उस दिन कुंवारी कन्याओं के द्वारा 108 दीप जलाए जाते हैं। प्रत्येक पूजा में मां का चेहरा परिवर्तित हो जाता है। पूजा के पहले दिन कलश स्थापना से लेकर पूजा के अंतिम दिन महा नवमी तक नियमित रूप से यहां श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है। यहां छाती पर कलश स्थापित करने की भी प्रथा चलती थी। वर्ष 2001, 2004 और 2005 में छाती पर कलश लिया गया था। उसके बाद कुछ परेशानियों के कारण इसे मेला कमेटियों के द्वारा बंद कर दिया गया।
सहरसा के कलाकार बनाते हैं प्रतिमा
समिति के व्यवस्थापक ने बताया कि यहां मूर्तियों का निर्माण सहरसा से आए कारीगर के द्वारा किया जाता है। वहीं, पंडाल की व्यवस्था स्थानीय टेंट हाउस के द्वारा की जाती है। साथ ही पूजा के पहले दिन से विसर्जन तक नगाड़ा बजाने वाले वादक बंगाल के मालदा से बुलाए जाते हैं। यह सारी व्यवस्था आयोजन समिति के अध्यक्ष रामावतार यादव, सचिव अशोक चौधरी के अलावा व्यवस्थापक में अशोक कुमार यादव, रामकुमार, अशोक कुमार, गुड्डू, गौतम, प्रशांत, रंजन, साजन, सुरेश सहित अन्य कार्यकर्ताओं के द्वारा किया जाता है। मेला कमेटी के अध्यक्ष कन्हैया पासवान 1965 से अब तक अध्यक्ष पद पर पदस्थापित हैं। स्थानीय लोगों और कमेटी के सदस्यों के द्वारा उन्हें आजीवन अध्यक्ष माना गया है।