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आदित्य हत्याकांडः इंसाफ से पहले ही दम तोड़ने लगी पुलिस की कवायद

Fri, 13 May 2016 03:03 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
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आदित्य सजदेव - फोटो : PTI
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बिहार में रोडरेज की घटना में जेडीयू एमएलसी के बेटे रॉकी के हाथों मारे गए गया के कारोबारी के बेटे को इंसाफ मिलने की लड़ाई पहले पायदान पर ही दम तोड़ती नजर आ रही है। पुलिस ने हत्या के वक्त छात्र के साथ रहे जिन दोस्तों को गवाह बनाने की तैयारी की थी उन्होंने इस बात से ही इंकार कर दिया कि गोली मारने वाले को उन्होंने देखा है। 
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पुलिस भी मामले की तफतीश किस गंभीरता से कर रही है इसका अंदाजा भी उस समय दिखा जब घटना के दौरान खून से लथपथ हुए आदित्य के कपडों को कूड़े के ढेर में फेंक दिया गया। जबकि खून से सने यह कपड़े कातिलों को सजा दिलाने में उनके विरुद्ध पुख्ता सबूत हो सकते थे। हालांकि आदित्य के भाई ने उन कपडों को दोबारा पुलिस तक पहुंचा दिया है, लेकिन मामले में पुलिस का ढीला रवैया कई सवाल खड़े कर रहा है। 

देश को हिला देने वाली रोडरेज की इस सनसनीखेज घटना में शुरूआती तेजी के बाद पुलिस के हाथ पांव सुस्त पड़ते दिख रहे हैं। मामले में चौतरफा घिरने के बाद बेशक बिहार सरकार ने कड़ी कार्रवाई का भरोसा दिलाया था लेकिन पुलिस का रवैया सरकार के दावे से मेल नहीं खा रहा। 
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पुलिस की पकड़ से दूर है रॉकी का चचेरा भाई टेनी यादव

इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है रॉकी यादव के साथ मुख्य आरोपी बनाए गए उसके चचेरे भाई टेनी यादव को अभी तक भी गिरफ्तार नहीं किया गया है। जबकि वह वारदात के साथ उसके साथ गाड़ी में मौजूद था। 

पुलिस के रवैये पर सवाल इसलिए भी खड़ा हो रहा है क्योंकि अभी तक रॉकी यादव ने गुनाह नहीं कबूला है और इस बात से भी इंकार नहीं किया जा सकता कल को टेनी ही आकर अदालत में कह दे कि यह गुनाह उसने किया है ऐसे में रॉकी यादव का बाल भी बांका नहीं होगा। 

इस बात की संभावना इसलिए भी ज्यादा है क्योंकि कुछ साल पहले रॉकी के पिता बिंदेश्वरी यादव उर्फ बिंदी यादव को जब पुलिस ने भारी हथियारों के साथ पकड़ा था तो उसके ड्राइवर ने अचानक अदालत में पहुंचकर सारा गुनाह अपने सिर ले लिया था और बिंदी यादव पुलिस की गिरफ्त से बाहर आ गया था। जबकि पुलिस ने उसके पास से 6 हजार से ज्यादा गोलियां बरामद की थी। 
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आदित्य के दोस्तों ने भी किया गोली चलाने वाले को पहचानने से इंकार

- फोटो : ANI
माना जाता था वह नक्सलियों को हथियारों की सप्लाई करता है। लेकिन अपने रसूख की वजह से आज तक बिंदी यादव का बाल भी बांका नहीं हुआ और वो अपनी पत्नी को जेडीयू के टिकट पर एमएलसी बनवाने में सफल रहा। 

पुलिस के लिए बड़ा झटका ये भी है कि वह मामले में गवाह के तौर पर मौजूद आदित्य के दोस्तों को भी अपने साथ नहीं रख सकी। तीनों दोस्तों ने गोली मारने वाले को पहचानने से ही इंकार कर दिया है। 

सबूत के तौर पर पुलिस के पास सबसे मजबूत साक्ष्य इस समय रॉकी से बरामद पिस्टल और आदित्य की पोस्टमार्टम रिपोर्ट है लेकिन पुलिस इसे कितनी मजबूती से अपने पक्ष में इस्तेमाल कर पाती है यह सवाल अभी बना हुआ है। हालांकि पुलिस और सत्ता की ताकत का अंदाजा आदित्य के घरवालों को भी है इसी वजह से वह लगातार मामले में सीबीआई जांच की मांग कर रहे हैं। लेकिन उन्हें कितना इंसाफ मिल पाता है यह सवाल अभी बाकी है।
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