Double Murder Case : सीवान के बहुचर्चित चिलमरवा डबल मर्डर केस में 11 साल बाद आज फैसला आ गया। भाकपा-माले के दो विधायकों समेत आठों आरोपियों को कोर्ट ने बरी कर दिया है। मर्डर केस में ही इस दल के मनोज मंजिल की विधायकी गई थी।
चर्चित चिलमारवा कांड में एडीजे 3 नरेन्द्र कुमार एमपी एमएलए कोर्ट ने फैसला सुनाया, जिसमें माले विधायक सतदेव राम और अमरजीत कुशवाहा को कोर्ट ने बरी कर दिया। आज दोनों नेता सुबह से ही कोर्ट परिसर में पहुंचे थे। अब इन्होंने राहत की सांस ली है।
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क्या था मामला
यह पूरा मामला 6 जुलाई 2013 का है, जहां गैर मजरुआ जमीन पर कब्जा करने के दौरान दो पक्षों में झड़प और फिर मारपीट हो गई। इस मारपीट में दूसरे पक्ष में माले कार्यकर्त्ता थे। मारपीट के दौरान गोलीबारी भी हुई, जिसमें दो लोगों की मौत हो गयी और एक व्यक्ति ग़ोली लगने से घायल हो गया था। मृतक की पहचान राज नारायण उर्फ़ राजू सिंह एवं दूसरे की पहचान मुकेश सिंह के रूप में की गई थी। इस घटना में विश्राम मिश्रा घायल हुआ था।
जेल से ही लड़े विधायक का चुनाव
मृतक के परिजनों ने गुठनी थाना में माले विधायक सतदेव राम और जीरादेई विधायक अमरजीत कुशवाहा सहित अन्य के विरुद्ध प्राथमिक की दर्ज कराई थी। उस समय सतदेव राम और अमरजीत कुशवाहा विधायक नहीं थे, फिर के बाद पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। उसके बाद सत्यदेव राम जेल में रहते हुए विधायक का चुनाव लड़े और विजयी हुए।
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11 साल बाद आये फैसले से खुश दिखे आरोपी
11 साल बाद हुए इस फैसले से माले कार्यकर्ता काफी खुश दिखे। कोर्ट परिसर से बाहर निकलते हुए दोनों विधायक अमरजीत कुशवाहा और सतदेव राम की आंखों में आंसू थे। दोनों विधायक भावुक होकर कोर्ट परिसर से निकले। इस मौके पर उन्होंने कहा कि मुझे कोर्ट पर पूरा भरोसा था, हम लोगों को फंसाने के लिए गलत आरोप लगाए गए थे, जो आज गलत साबित हुए। उन्होंने कहा कि मुझे इसके लिए एक लंबी लड़ाई लड़नी पड़ी, उसके बाद आज कोर्ट ने हम लोगों को बरी कर दिया। इस तरह आज हम लोगों की जीत हुई है। इस पूरे मामले पर बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने कहा कि 11 साल तक चली सुनवाई में करीब 50 से ज्यादा लोगों की गवाही हुई। इसके बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था और आज 30 मार्च 2024 को अपने फैसले में तमाम आरोपियों को बरी करते हुए एक बड़ा फैसला सुनाया है।