जीत का सर्टिफिकेट लेते विशाल प्रशांत।
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चार विधायकों के सांसद बनने से खाली हुई बिहार विधानसभा की चार सीटों में से भोजपुर जिले की तरारी सीट पर मतगणना का रुझान सबसे बाद में आना शुरू हुआ था, लेकिन जीत का सीन सबसे पहले दिख गया। तरारी विधानसभा सीट भारतीय कॉम्युनिस्ट पार्टी-मार्क्सवादी लेनिनवादी (भाकपा-माले) के पास थी। महागठबंधन के भाकपा-माले विधायक सुदामा प्रसाद के सांसद बनने के बाद खाली हुई सीट उसी पार्टी के पास छोड़ी गई थी। भाकपा-माले यह सीट अपने पास कायम नहीं रख सकी। राजनीति में नए-नए आए भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी विशाल प्रशांत ने यहां से जीत हासिल कर ली है। बड़े अंतर के कारण औपचारिक घोषणा से पहले ही राजग के समर्थक जीत का जश्न मनाने लगे। 'अमर उजाला' ने इस सीट के लिए अपना आकलन पहले ही सामने ला दिया था कि यहां सेंधमारी की बदौलत राजग अपनी एकजुटता से जीत हासिल करने वाली है।
बड़े अंतर के बाद ही जीत का जश्न शुरू
भोजपुर जिले की तरारी सीट पर भाकपा-माले प्रत्याशी राजू यादव ने जनसंपर्क और पैदल यात्रा पर फोकस किया था, लेकिन सेंधमारी रोकना उनके लिए चुनौती थी। 23 नवंबर को मतगणना का दौर शुरू होने से एक दिन पहले 'अमर उजाला' ने सेंधमारी को निर्णायक बताते हुए यह साफ किया था कि भारी कौन पड़ेगा। परिणाम में शुरुआती रुझानों से यह दिखने भी लगा था। सवा सौ वोटों के अंतर से शुरू में विशाल प्रशांत आगे दिखने लगे। फिर यह अंतर 500 और फिर 5000 भी पार कर गया। अंतिम राउंड शेष रहते जब यह अंतर करीब 10 हजार हो गया तो राजग प्रत्याशी के जीत का जश्न शुरू हो गया। इस जश्न को देखते हुए आरा शहर के केजी रोड नवादा स्थित राजकीय कन्या उच्च विद्यालय मतगणना केंद्र में आवाजाही पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई। राजग समर्थक बाहर जीत का जश्न मनाने लगे और महागठबंधन से जुड़े लोग हताश भी दिखने लगे, लेकिन औपचारिक घोषणा का इंतजार सभी को था। माले प्रत्याशी राजू यादव ने हार स्वीकारते हुए कहा- "केंद्र की पूरी टीम और भाजपा की राज्य टीम ने मिलकर हरा दिया। गरीबों की हार हुई है और अमीरों की जीत हुई है।" अंतिम राउंड की गिनती में भाजपा प्रत्याशी विशाल प्रशांत 10612 वोट से जीत गए। उन्होंने 10612 से भाकपा माले के राजू यादव को हरा दिया। विशाल प्रशांत को 78755 वोट मिले। वहीं भाकपा माले के राजू यादव को 68143 वोट मिले। जनसुराज की किरण देवी 5622 वोट पाकर तीसरे नंबर पर रहीं। 3560 मतदाताओं ने नोटा बटन दबाया।
जश्न मनाते राजग समर्थक।
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भाजपा की जीत की वजह वही, जो तय थी
भाजपा के जरिए राजग ने महागठबंधन की यह सीट छीन ली। यहां भाजपा से ज्यादा राजग की जीत कहना गलत नहीं होगा। इस सीट पर जीत में क्या अहम राह- 1. सत्तारूढ़ जनता दल यूनाईटेड के कभी विधायक रहे सुनील पांडेय ने बेटे विशाल प्रशांत की जीत के लिए सारे घोड़े खोल दिए थे। 2. राजग में भाजपा के साथी सभी दल पूरे मन से यहां जुटे थे। जदयू कोटे के केंद्रीय मंत्री और राज्य सरकार के मंत्री के करीबी भाजपाई प्रत्याशी के लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी जनसभा करने आए थे। इस जनसभा में राजग के नेताओं ने एकजुटता दिखाई थी। चिराग पासवान भी आए थे। माले समर्थक रहे दुसाध वोटरों को साधने के लिए चिराग पासवान ने न केवल सीएम के साथ सभा की, बल्कि रोड शो के जरिए भी वोटर बटोरे। केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी की हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा ने माले के मुसहर वोटरों में राजग के लिए सेंधमारी की। यह सेंधमारी तो हुई ही, माले का बनिया प्रत्याशी की जगह यादव प्रत्याशी लाना भी भाजपा के लिए अच्छा रहा। वैश्य वोटर सुदामा प्रसाद की जगह राजू यादव को स्वीकार नहीं कर सका और भाजपा के साथ हो लिया।