फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Bihar News: कांग्रेस-राजद से असंतुष्ट या भाजपा से उम्मीद में पाला बदल रहे विधायक; सामने आ रही वजह

Fri, 01 Mar 2024 05:05 PM IST
आदित्य आनंद न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना

सार

BJP News : 28 जनवरी से शुरू हुआ था कि बिहार में खेला होगा, खेला होगा...। जो दावा कर रहे थे, उनके साथ ही खेला हो गया। अब सवाल उठना लाजिमी है कि कांग्रेस-राजद से असंतुष्टि वजह है या भाजपा से उम्मीद? क्या तर्क ज्यादा मजबूत है, जानिए आगे।
विज्ञापन
महागठबंधन के यह विधायक अपना पाला बदल चुके हैं। - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी कह रहीं कि नुकसान जनता दल यूनाईटेड को होगा। भाजपा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी को खा जाएगी। राबड़ी देवी यह चेतावनी बार-बार दुहरा रहीं। लेकिन, जदयू को यह नुकसान न तो भाजपा से दूर रहते हुआ और न साथ आने के बाद अबतक। उलटा, उनके पति लालू प्रसाद यादव की पार्टी राष्ट्रीय जनता दल को पांच विधायकों का नुकसान हो चुका है। राजद के साथ विपक्ष में मजबूती से खड़ी कांग्रेस को अबतक दो विधायकों का नुकसान हो चुका है और बाकी कई कतार में दिख रहे हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि कांग्रेस या राजद से असंतुष्टि इस भगदड़ की वजह है या भाजपा से उम्मीद में यह सब हो रहा है?

विज्ञापन




विधानसभा चुनाव दूर, फिर विधायकों में भगदड़ क्यों

लोकसभा चुनाव 2024 में होना है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जदयू ने एक देश, एक चुनाव का समर्थन किया था। बिहार विधानसभा भंग करने की चर्चा बार-बार उठ रही है, हालांकि ऐसा फिलहाल होता नहीं दिख रहा है। इससे नफा-नुकसान दोनों होगा, अलग तरीके से और हर पार्टी को। ऐसे में क्या विधानसभा चुनाव की संभावना देख विधायक पाला बदल रहे हैं? इस सवाल पर वरिष्ठ पत्रकार प्रवीण बागी कहते हैं- "चुनावों के ठीक पहले यह होता है। बड़े दलों के स्थायी नेताओं को छोड़ दें तो यह खूब होता है। जिस पार्टी की हवा होती है, नेता उधर का रुख करते हैं। जिधर व्यक्तिगत स्तर पर राजनीतिक भविष्य सुरक्षित नजर आता है, वह प्राथमिकता होती है। लोकसभा चुनाव के पहले विधायकों के पाला बदलने के पीछे एक कारण यह हो सकता है कि सामने संसदीय टिकट की उम्मीद हो या कुछ बड़ा मिलने की डील हुई हो।"

छूट रहे घर की दीवारों के अंदर दरार

चाणक्य इंस्टीट्यूट ऑफ पॉलिटिकल राइट्स एंड रिसर्च के अध्यक्ष सुनील कुमार सिन्हा कहते हैं कि देश का विपक्ष बेहद कमजोर हो गया है। राजनीतिक भविष्य नहीं नजर आ रहा है। अगर इंडी एलायंस में नीतीश कुमार को समय पर उम्मीद अनुसार सबकुछ मिल गया होता तो शायद यह स्थिति नहीं होती। भले ही नीतीश कुमार को अविश्वसनीय कहा गया, लेकिन उनके रहने से इंडी एलायंस पर शायद विश्वसनीयता होती। कांग्रेस लीड करने उतर तो गई, लेकिन उसमें जोश नहीं है। ईडी-सीबीआई पर आरोप लगाने या राम मंदिर का विरोध करने से भी लोग टूटे होंगे। वैसे, बिहार में ज्यादातर व्यक्तिगत वजह लग रही है। जहां हैं, वह असुरक्षित है और जहां जा रहे हैं- वह मजबूत है। वहीं उम्मीद है, यह सोचकर जा रहे होंगे। यह उम्मीद कुछ पाने या भविष्य की किसी परेशानी से बचने की भी हो सकती है, हरेक आदमी के लिए अलग तरह से यह लागू है।

विज्ञापन


अबतक महागठबंधन को सात का नुकसान
महागठबंधन को नुकसान का सिलसिला पिछले महीने तब शुरू हुआ, जब राजद ने बिहार की नीतीश कुमार सरकार का बहुमत परीक्षण कराने की ठानी। 12 फरवरी को बहुमत परीक्षण के दिन लालू प्रसाद यादव की पार्टी राजद को तीन विधायकों का नुकसान हुआ। 'अमर उजाला' ने बाहुबली पूर्व सांसद आनंद मोहन के बेटे चेतन आनंद और बाहुबली पूर्व विधायक अनंत सिंह की पत्नी नीलम देवी के पाला बदलने की जानकारी पहले ही दी थी। बहुमत के दिन एक और नाम प्रह्लाद यादव का जुड़ गया। फिर 27 फरवरी को कांग्रेस के विधायक मुरारी गौतम और सिद्धार्थ सौरभ भाजपा में चले गए। उनके साथ राजद विधायक संगीता देवी ने भी भगवा धारण किया। अब राजद विधायक भरत बिंद ने भाजपा का दामन थाम लिया है। भगदड़ अभी जारी है। खास बात यह भी है कि भाजपा में आने वाले सीधे आ गए हैं, जबकि बहुमत परीक्षण के दिन राजद छोड़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार की तरफ बैठने वाले तीनों विधायकों ने अपनी नई आस्था प्रकट नहीं की है। चेतन आनंद, नीलम देवी और प्रह्लाद यादव जदयू खेमे में जाने वाले दिख तो रहे हैं, लेकिन घोषणा नहीं कर रहे।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें