एएसपी डॉ. राकेश
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शेखपुरा जिले के मेहुस थाना क्षेत्र में एक अमानवीय और शर्मनाक घटना सामने आई है। आरोप है कि मेहुस थाना प्रभारी प्रवीणचंद्र दिवाकर ने एक ई-रिक्शा चालक प्रदुमन कुमार को उसकी जाति पूछकर न सिर्फ बेरहमी से पीटा, बल्कि थाने में ले जाकर जमीन पर थूककर जबरन थूक भी चटवाया।
प्रदुमन कुमार ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि वह रोज ई-रिक्शा चलाकर अपने परिवार का गुजारा करता है। सोमवार शाम लगभग साढ़े सात बजे वह शेखपुरा से सवारी लेकर मेहुस गांव पहुंचा था। सवारी उतारने के बाद वह चौक की ओर बढ़ रहा था, तभी एक बुलेट सवार ने उसे ओवरटेक कर रोका और गालियां देने लगा। चूंकि वह व्यक्ति सादे कपड़ों में था, इसलिए प्रदुमन उसे पहचान नहीं पाया। बाद में पता चला कि वह मेहुस थाना प्रभारी हैं।
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थानाध्यक्ष ने मौके पर ही गाली-गलौज करने के बाद पुलिस वाहन मंगवाकर प्रदुमन को पकड़वा लिया। फिर सड़क पर ही लाठियों से जमकर पीटा गया। इसके बाद उसका मुंह सूंघकर शराब पीने का आरोप लगाने की कोशिश की गई लेकिन पुष्टि न होने पर थप्पड़ मारते हुए उसे थाने ले जाया गया। प्रदुमन का आरोप है कि थाने में भी उसे बेरहमी से पीटा गया और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया। थानाध्यक्ष ने उसकी जाति पूछी। जब उसने स्वयं को ब्राह्मण बताया, तो थानेदार ने कथित रूप से कहा- ब्राह्मणों को देखना भी पसंद नहीं है। इसके बाद उन्होंने जमीन पर थूका और प्रदुमन से जबरन थूक चटवाया। यह घटना उसी थाने में घटी, जहां आम नागरिक को न्याय मिलने की उम्मीद होती है।
घटना में घायल प्रदुमन को गंभीर चोटें आई हैं। परिजनों ने उसे शेखपुरा सदर अस्पताल में भर्ती कराया, जहां उसका इलाज जारी है। पीड़ित ने अपने परिजनों और स्थानीय विधायक सुदर्शन कुमार को पूरी घटना की जानकारी दी। विधायक ने घटना को बेहद गंभीर बताते हुए प्रशासन से तत्काल कार्रवाई और निष्पक्ष जांच की मांग की है। घटना के सामने आने के बाद बिहार में पुलिसिया बर्बरता और जातीय भेदभाव का मुद्दा एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। सामाजिक कार्यकर्ताओं, मानवाधिकार संगठनों और कानूनविदों ने मांग की है कि आरोपी थानाध्यक्ष के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर गिरफ्तारी, तत्काल निलंबन, पीड़ित को सरकारी मुआवजा और सुरक्षा तथा पूरे मामले की न्यायिक जांच कराई जाए।
एएसपी डॉ. राकेश ने जानकारी देते हुए बताया कि मामले की जांच की जा रही है। प्रारंभिक जांच में आरोपों को गंभीर और सही पाए जाने के बाद थानाध्यक्ष प्रवीणचंद्र दिवाकर को तत्काल पद से हटा दिया गया है। आगे की विधिसम्मत कार्रवाई प्रक्रिया में है।