बिहार विधानसभा की तरारी सीट पर इनकी होगी टक्कर।
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बिहार विधानसभा की तरारी सीट यहां के विधायक सुदामा प्रसाद के सांसद बनने के बाद खाली हुई थी और इसपर उप चुनाव भी हो गया है। उप चुनाव में जीतने वाले विधायक पूरे एक साल भी नहीं रहेंगे, लेकिन जंग जबरदस्त हुई। चुनाव परिणाम कल आएगा, उससे पहले रात में जो तैयारी और चर्चा है- वह बता रही है कि टक्कर आमने-सामने की हुई है। तीसरा पक्ष किनारे ही पड़ा रहा गया और वोट काटने वाले से ज्यादा कोई भूमिका नहीं रही। उससे भी खास बात यह कि वोटों की सेंधमारी करने वाला ही इस सीट पर भारी पड़ेगा, यह तय है।
वोटिंग के दिन से मतगणना की पूर्व संध्या तक क्या बता रहा मिजाज?
भोजपुर जिले में है तरारी विधानसभा सीट। यहां राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की ओर से भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी प्रत्याशी विशाल प्रशांत और महागठबंधन समर्थित भाकपा-माले प्रत्याशी राजू यादव के बीच ही अंतिम तौर पर टक्कर है। 13 नवंबर को मतदान के बाद अब 22 नवंबर को मतगणना की पूर्व संध्या तक इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन को तो कोई नहीं पढ़ सका है, लेकिन 'अमर उजाला' ने जो मिजाज पढ़ा है- वह बता रहा है कि यह सीट भाकपा-माले के खाते से निकल भी सकती है। वजह 1. सत्तारूढ़ जनता दल यूनाईटेड के कभी विधायक रहे सुनील पांडेय ने बेटे विशाल प्रशांत को इस उप चुनाव में जिताने के लिए सारे घोड़े खोल दिए थे। 2. राजग में भाजपा के सहयोगी दल पूरे मनोयोग से यहां जुटे थे। जदयू के दिग्गज केंद्रीय मंत्री और राज्य सरकार के मंत्री के करीबी भाजपाई प्रत्याशी के लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी आए थे। माले समर्थक रहे दुसाध वोटरों को साधने के लिए चिराग पासवान ने न केवल सीएम के साथ सभा की, बल्कि रोड शो भी किया। केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी की हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा ने माले के मुसहर वोटरों में राजग के लिए सेंधमारी का प्रयास किया।
नफा-नुकसान की वजह के साथ कई और कारण भी मायने रखेंगे
माले के लिए नुकसान का एक कारण यह भी रहा कि बनिया जाति के सुदामा प्रसाद के सांसद बनने के बाद उनकी जगह राजू यादव के उतरने पर यह वोटर स्वाभाविक तौर पर भाजपा की ओर रुख किए बताए जा रहे हैं। वैसे, ऐसा नहीं है कि सबकुछ भाजपा प्रत्याशी विशाल प्रशांत के पक्ष में ही रहा। ब्रह्मेश्वर मुखिया लॉबी और भूमिहार जाति के वोटरों ने सुनील पांडेय का विरोध जताने के लिए भाजपा के खिलाफ वोटिंग भी की थी। जहां तक राजू यादव का सवाल है तो उनके साथ सबसे ज्यादा अच्छी बात लोकल होना है। विशाल प्रशांत तरारी नहीं, बल्कि डिहरी के रहने वाले हैं। राजू यादव तरारी के हैं और उन्होंने हवा-हवाई प्रचार की जगह पैदल जनसंपर्क के माले फॉर्मूला पर ज्यादा काम किया है। मतलब, सीधे वोटरों से मिले-जुड़े हैं।
प्रशांत किशोर की प्रत्याशी ने कहां-किसे लगाई सेंध, यह भी जानिए
प्रशांत किशोर की पार्टी जन सुराज ने बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के पहले इन चार सीटों के उप चुनाव में अपना प्रत्याशी देते हुए मजबूत दावेदारी बताई थी, लेकिन तरारी में मतदान से लेकर मतगणना की पूर्व संध्या तक लोगों के मन-मिजाज में प्रत्याशी किरण सिंह का नाम कम आ रहा है। मुसलमान वोटरों के बीच इनका नाम है। किरण सिंह के गांव में ब्राह्मण-राजपूत भी इनके नाम की चर्चा करते हैं, लेकिन बाकी कहीं धमक नहीं दिखाई दे रही। ऐसे में इनसे कितनी उम्मीद और बाकी प्रत्याशियों की बात क्या की जा सकती है!
(इनपुट:
गौरव सिंह, आरा)