यह रिपोर्ट बिहार विधानसभा में पेश की गई।
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क्या बिहार की 31.16 प्रतिशत आबादी, मतलब चार करोड़ 7 लाख 39 हजार 790 लोग अनपढ़ हैं? सरकार ने बिहार की जाति आधारित जनगणना की आर्थिक रिपोर्ट में पूरी आबादी की शैक्षणिक स्थिति का जिक्र किया है, लेकिन अशिक्षित को अलग से इंगित नहीं किया है। इस रिपोर्ट में प्राइमरी से लेकर डॉक्टरेट तक को वर्गीकृत करने के बाद 'अन्य' का आंकड़ा दिया गया है। इस 'अन्य' में 31.16 प्रतिशत आबादी है, यानी 13 करोड़ में से 4 करोड़ से ज्यादा लोग इस श्रेणी में हैं। उसके बाद सबसे ज्यादा 22.67 प्रतिशत, यानी 2 करोड़ 96 लाख 28 हजार 423 लोग प्राइमरी तक पढ़े हैं। मतलब, पहली से पांचवीं तक अधिकतम।
उच्चतर माध्यमिक तक पढ़ने वाले व्यक्ति की संख्या 9.19 फीसदी
प्राथमिक (कक्षा एक से पांच) तक पढ़ने वाले व्यक्ति की संख्या 2 करोड़ 96 लाख 28 हजार 423 है। इनकी आबादी 22% है। मध्य (कक्षा 6 से 8) तक पढ़ने वाले व्यक्ति की संख्या एक करोड़ 87 लाख 34 हजार 033 है। इनकी आबादी 14.33 प्रतिशत है। माध्यमिक (कक्षा 9 से 10) तक पढ़ने वाले व्यक्ति की संख्या एक करोड़ 92 लाख, 29 हजार 997 है। इनकी आबादी 14.71% है। उच्चतर माध्यमिक (कक्षा 9 से 10) तक पढ़ने वाले व्यक्ति की संख्या एक करोड़ 20 लाख 12 हजार 146 है। इनकी आबादी 9.19% है।
बिहार में एमबीबीएस करने वालों की महज 0.06 फीसदी
वहीं डिप्लोमा, आईटीआई वाले व्यक्ति की संख्या 7 लाख 52 हजार 756 है। इनकी आबादी 0.58 है। स्नातक (अभियंत्रण) यानी इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने वालों की संख्या 3 लाख 92 हजार 364 हैं। इनकी आबादी 0.30% है। वहीं स्नातक (चिकित्सा) यानी एमबीबीएस करने वालों की संख्या 74 हजार 175 है। इनकी आबादी 0.06 % है। अन्य स्नातक की संख्या 79 लाख 89 हजार 528 है। इनकी आबादी 6.11% है। स्नातकोत्तर की आबादी 10 लाख 76 हजार 700 है। इनकी आबादी 0.82% है। डॉक्टरेट/ सीए की संख्या 95 हजार 398 है। इनकी आबादी 0.07% है। अन्य की संख्या 4 करोड़ 7 लाख 39 लाख 790 है। इनकी आबादी 31.16 फीसदी है।