नीति आयोग की बैठक से पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी के जाने के सवाल पर चिराग पासवान ने कहा कि उस बैठक में में भी मौजूद था और ये सरासर गलत इल्जाम है कि किसी का माइक वहां पर बंद कर दिया। पहली बात तो जब यह विपक्ष बोलता है कि माइक बंद कर दें। उस माइक कंट्रोल यहां पर बैठे किसी भी व्यक्ति के हाथ में नहीं होता है, उस व्यक्ति के खुद के हाथ में होता है। न लोकसभा में न राज्यसभा में और न ऐसी किसी बैठकों में ऐसी बैठक में माइक सामने लगे होते हैं। यह बात बोलना सरासर झूठ है, जब कोई बोलता है कि मेरा माइक बंद कर दिया गया। हर मुख्यमंत्री से यह विनम्रता पूर्वक आग्रह किया गया था कि अपनी बातों को संक्षेप में एक तय समय सीमा के भीतर रखा जाय। जब उस समय सीमा पूरी हुई सिर्फ एक रिमाइंडर के तौर पर उनको जरूर जैसे तमाम मुख्यमंत्री के दुबारा से नोटिफाई किया गया कि आपका समय समाप्त हो रहा है। इतनी सी बात पर जिस तरीके से बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी एकदम से उत्तेजित होकर उस बैठक को बीच में ही छोड़कर चली गईं।
चिराग ने कहा- उनका आचरण गलत
चिराग पासवान ने कहा कि मुझे लगता है यह आचरण गलत है। अगर आपको अपनी बात रखना भी है कोई नाराजगी भी है तो वहीं पर रखती हैं। बोलती कि अभी मुझे और बोलना है। मुझे और कहना। हम सब वहां पर मौजूद थे प्रधानमंत्री जी उनको सुनना चाहते थे। चिराग ने कहा कि जिस तरीके से उनका आचरण था इससे ऐसा लगता है कि विपक्षी पहले से ही सोची समझी एक रणनीति का हिस्सा था कि वह जाएंगी हंगामा खड़ा करें और नीति आयोग की बैठक में जिस मकसद के साथ हम लोग वहां पर बैठे थे उस मकसद को डायवर्ट करके सिर्फ अपनी ओर पूरा ध्यान केंद्रित करने के उद्देश्य से इस तरीके की कार्रवाई की गई है।
झारखंड के रामगढ़ में बिहारियों का मुखिया बनने वाले कांग्रेस के बयान पर चिराग पासवान ने कहा कि विपक्ष के नेता क्षेत्रवाद फैलाने का काम समय समय पर करते रहते हैं। कभी जाती, कभी धर्म और कभी क्षेत्र के आधार पर वह समाज को बांटने की कोशिश करते हैं। मुझे गर्व महसूस हो रहा है यह कहने में कि बिहारियों में इतना सामर्थ्य है कि वह देश के हर राज्य में सबसे बड़े पद से लेकर मजदूर की भूमिका बिहारी निभाते हैं। आप बड़े बड़े बिजनेस हाउस, मीडिया हाउस, बड़े बड़े पदों पर आपको बिहारी ही मिलेंगे। सबसे ज्यादा आईएस अफसर बिहार से आते हैं। कल नीति आयोग की बैठक में कई बड़े अधिकारी शामिल हुए, उन्होंने बताया कि वह भी बिहार से हैं। एक ऐसा बड़ा तबका भी बिहारियों का है, जो उस राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का काम करते हैं। बिहारी देश में अपना झंडा बुलंद करते हैं। भारतीयों को यह अधिकार है वो देश में कहीं भी जाकर अपना काम कर सकें।