देश स्वच्छता की ओर बढ़ रहा है, खुले में शौच पर प्रतिबंध लगाने के लिए देशभर में नए-नए तरह के अभियान चलाए जा रहे हैं। पिछले दिनों बिहार स्कूल ऑफ बोर्ड ने सर्कुलर जारी कर कहा है कि शिक्षकों को सुबह और शाम के वक्त ग्रामीण इलाकों में खुले में शौच के लिए जाने वाले लोगों को रोकना होगा और उन्हें जागरूक करना होगा। उस आदेश के बाद बिहार के शिक्षक गुस्से मे हैं।
बोर्ड ने अपने आदेश में कहा है कि शिक्षकों को समाज में इज्जत से देखा जाता है और अगर वे सोसाइटी को जागरूक करेंगे तो समाज जल्दी गंदगी से मुक्त होगा। बोर्ड के इस फैसले के समर्थन में राज्य के शिक्षा मंत्री के एन प्रसाद वर्मा उतर आए हैं।
पढ़ें: हार्दिक पटेल बोले- कांग्रेस ने मानी आरक्षण की मांग, BJP ने दिया था 1200 करोड़ का ऑफर
उन्होंने कहा कि बिहार बोर्ड का यह निर्णय स्वागत योग्य है इसमें बेकार ही विवादित बनाया जा रहा है। शिक्षकों का समाज में एक आदर होता है। विभाग ने सोचा कि अगर शिक्षक जागरुकता फैलाएंगे तो लोग उन्हे जरूर सुनेंगे और उसपर अमल भी करेंगे। प्रसाद ने आगे कहा कि बोर्ड के इस फैसले का मतलब ये नहीं है कि इस काम के लिए शिक्षकों को पढ़ाना छोड़ना है।
Clicking selfies with defaulters is different matter, personally I didn't like it. We just want teachers to exercise their influence in society & bring awareness.: #Bihar Education Minister on order stating teachers to keep a tab on open defecation defaulters pic.twitter.com/NQPpX7rzF4
— ANI (@ANI) November 22, 2017