जेल हालत देखकर लोग दंग हैं।
- फोटो : अमर उजाला
कारा प्रशासन ने इस ओर से पूरी तरह नजरें मोड़ ली
पुराने जेल की सुरक्षा का जिम्मा औरंगाबाद नगर थाना की गश्ती टीम को सौंपने के बाद कारा प्रशासन ने इस ओर से पूरी तरह नजरें मोड़ ली। वहीं पुलिस की गश्ती टीम रात में आती और जेल का बाहर से ही चक्कर लगाकर जाती रही। गश्ती दल ने कभी भी परिसर के अंदर दिन में भी जाकर मुआयना करना मुनासिब नहीं समझा। यही वजह है कि यहां गजब का खेला हो गया। हालांकि जेल प्रशासन ने तो पुराने जेल को लॉक कर रखा था। कहीं से किसी के घुसने की गुंजाईश नहीं थी लेकिन गुंजाईश बनाई गई। पहले पुराने जेल के मेन गेट के बगल में बने सिपाही बैरक की खिड़कियों की सरिया उखाड़ ली गई। फिर खिड़कियों के पल्ले उखाड़ लिए गए। मतलब पुराने जेल परिसर के अंदर जाने का चोर दरवाजा खुल गया।पुराने जेल परिसर के अंदर जाने के लिए चोर दरवाजा खुलते ही असामाजिक तत्वों की पैठ सूने पड़े पूरे जेल के अंदर हो गई। इसके लिए उनके द्वारा चोर दरवाजें से घुसकर पहले जेल के अंदर लोहे के दूसरे मेन गेट का ताला तोड़ डाला गया। फिर उसके बाद बने लकड़ी के मोटे गेट को आग के हवाले कर दिया गया। इसके बाद बिल्कुल जेल के अंदर मुलाकाती कक्ष, जेलर, जेल सुपरिटेंडेंट कक्ष, महिला-पुरूष कैदी वार्ड से लेकर किचेन, टॉयलेट और जेल की छ्त के उपर जाने समेत परिसर के हर कोने तक जाने के लिए तोड़ ताड़ करते हुए पूरा रास्ता ही खुल गया।
रास्ता खुलने के बाद ही हुआ खेला
इस तरह से रास्ता कब खुला, कितने दिन में खुला, इसकी दिन-तारीख तो तय नही की जा सकती लेकिन इतना जरूर कहा जा सकता है कि यह सब एक दो दिन में तो नही हो सकता। इसमें महीनों जरूर लगे होंगे। इसके बाद संभवतः रात के अंधेरें में संभवतः असामाजिक तत्वों का अड्डा बन गया। असामाजिक तत्व पुराने जेल परिसर के अंदर लगी बिजली वायरिंग के वायर, स्विच बोर्ड, एनसीबी बोर्ड, मोटर स्टार्टर, सोलर पैनल एवं अन्य सामान उखाड़ ले गए। वैसे तो शिफ्टिंग के बाद से पुराने जेल का मेन गेट रोज ही बंद नजर आता है लेकिन मीडियाकर्मियों की नजर अचानक से खुले गेट पर पड़ी। कैम्पस के अंदर कुछ हलचल दिखी। लिहाजा कौतूहल वश मीडियाकर्मी पुराने जेल परिसर के अंदर घुस गए। पता चला कि भवन निर्माण विभाग के लोग है, जो इस पूरे परिसर को किसी दूसरे सरकारी विभाग को सौंपे जाने के लिए सर्वे कर रहे है। इसके बाद जब मीडिया ने पूरे जेल परिसर का चप्पा चप्पा छान मारा। इसके बाद जो सब कुछ उजागर हुआ, वह अब सबके सामने है।
जेल अधीक्षक को भी मीडिया से ही मिली पूरे खेल की जानकारी
पुराने जेल के हाल से रुबरू होने के बाद मीडियाकर्मियों ने जेल अधीक्षक सुजीत झा को कॉल किया। पूरी बात बताई। उनसे उनका पक्ष जानने नये मंडल कारा पहुंचे। इसके बाद जो कुछ उन्होने कहा, वह न केवल अपना दामन बचाने वाला है बल्कि आश्चर्यजनक भी है। जेल अधीक्षक ने कहा कि उनके माध्यम से मामला संज्ञान में आया है। मामले की औरंगाबाद नगर थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई जा रही है। कहा कि शिफ्टिंग के बाद कुछ माह तक जेल पुलिस पुराने परिसर में तैनात थी। बाद में जरूरत पड़ने पर उन्हे यहां बुला लिया गया। इसके बाद पुराने जेल परिसर की सुरक्षा के लिहाज से उन्होने लिखित रूप से औरंगाबाद नगर थाना से गश्ती के दौरान नजर बनाएं रखने का आग्रह किया था। उन्होने तिरंगे का अपमान के बाबत पूछे जाने पर कहा कि शिफ्टिंग के वक्त ही हमने सारे तिरंगें झंडें पुराने जेल परिसर से हटा लिए थे। ऐसा है तो देखना पड़ेगा, पूछना पड़ेगा।