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Bihar : औरंगाबाद में पांचवी बार माहौल बिगाड़ने की कोशिश, आपत्तिजनक खाद्य पदार्थ रखने वाले अब तक नहीं पकड़ाए

Sun, 24 Dec 2023 05:43 PM IST
आदित्य आनंद न्यूज डेस्क, अमर उजाला, औरंगाबाद

सार

पूर्व की घटनाओं को देखते हुए जिला प्रसाशन ने कई महीनों तक मंदिरों की रखवाली के लिए पुलिस नियुक्त किया था। अमझरशरीफ में टीओपी की स्थापना की।
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लोगों से बातचीत करते अधिकारी। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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औरंगाबाद में पिछले पांच माह में अब तक पांच बार माहौल बिगाड़ने की कोशिश की गई है। शनिवार को मंदिर में आपत्तिजनक खाद्य पदार्थ (जिसे, पूजा करते समय लोग नहीं छूते) रखा गया था। इसके बाद माहौल इतना बिगड़ गया था कि महिला अंचलाधिकारी को खुद मंदिर में झाड़ू लगाना पड़ा था। घटना के बाद लोगों का कहना है कि पेिछले पांच माह में अमझरशरीफ के इलाके में धर्म स्थल में आपत्तिजनक खाद्य पदार्थ पांच बार रखे गए हैं लेकिन अब तक पुलिस ऐसा करने वालों को गिरफ्तार नहीं कर पाई है। 

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लोगों का कहना है कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृति रोकने में पुलिस अबतक विफल रही है। पहली बार 2 जुलाई को हसपुरा के अमझरशरीफ के एक देवी मंदिर, बाजार के दो देवी मंदिरों सहित दुकान में आपत्तिजनक खाद्य पदार्थ रखा गया। इसके बाद 17 जुलाई को बाजार के मुसनी दादी ठाकुरबाड़ी से बालकृष्ण की मूर्ति की चोरी हुई। वहीं 18 जुलाई को हसपुरा के मस्ज़िद गली निवासी हरि भगवान उर्फ प्रेम जी के घर के दरवाजे पर आपत्तिजनक खाद्य पदार्थ रखकर धार्मिक भावनाओं को आहत किया गया था। सभी घटनाओं की जानकारी लिखित आवेदन के माध्यम से हसपुरा थाना को दिया गया था।

आक्रोश कभी भी भड़क सकता है
इधर, इन सभी घटनाओं के बाद पुलिस शांति व्यवस्था बनाए रखने व शीघ्र उपद्रवियों की गिरफ्तारी का आश्वासन देकर मामले को शांत कराती रही है। इससे पहले हसपुरा के ग्रामीणों ने 10 जुलाई को बैठक कर 2 जुलाई की घटना का उद्भेदन नहीं होने के विरोध में 17 जुलाई से अनिश्चितकालीन बाजार बंद और आंदोलन करने का निर्णय लिया था। इसकी लिखित सूचना औरंगाबाद के डीएम, एसपी व प्रदेश के वरीय अधिकारियों को ही थी। इसके बाद दो लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। मामले में वरीय अधिकारियों की अपील पर ग्रामीणों ने शांति बनाए रखने की बात मान ली है। लेकिन,  आक्रोश कभी भी भड़क सकता है। प्रशासन को बहुत ही सुझबूझ से काम करने की जरूरत है।
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अमझरशरीफ में पुलिस ने बनाया था टीओपी
पूर्व की घटनाओं को देखते हुए जिला प्रसाशन ने कई महीनों तक मंदिरों की रखवाली के लिए पुलिस नियुक्त किया था। अमझरशरीफ में टीओपी की स्थापना की। ग्रामीणों की शिकायत पर पुलिस प्रशासन ने अमझरशरीफ में संचालित तीन दर्जन अवैध बूचड़खानों को भी बंद करा कर उन्हें अन्य रोजगार से जोड़ने की पहल की लेकिन प्रशासन की कोई भी तरकीब काम नहीं आ रही है। ऐसी घटनाएं घट ही जा रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि अभी भी प्रसाशन की नाक के नीचे अवैध स्लाटर हाउस चलता है।

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