बहनों, डटकर आईएएस व पीसीएस परीक्षा की तैयारी करो, जहां दिक्कत होती है मेरे घर के दरवाजे खुले हैं। यह कहना है महिला आईपीएस अमनीत कौंडल का, जो जालंधर में एडिशनल डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस ट्रैफिक के पद पर तैनात हैं। वे जालंधर के एपीजे स्कूल से पढ़ी हैं। वह ट्रैफिक के नियम लागू करने और लड़कियों को उच्च शिक्षा दिलाने के लिए प्रयास भी कर रही हैं। अमनीत ने अमर उजाला के साथ बातचीत में कहा कि लड़कियों में काफी प्रतिभा है, बस जरूरत उनका हौसला बढ़ाने की है। उनका हौसला बढ़ता जा रहा है।
अमनीत का जन्म 1984 में हुआ। वे रूपनगर की रहने वाली हैं। उनके पिता मोहिंदर सिंह आयकर विभाग में अधिकारी थे, जबकि माता मोहिंदर कौर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में तैनात थी। बचपन से ही अमनीत के दिल में कसक थी कि वह उच्च मुुकाम को हासिल करेगी। इसके लिए चाहे उनको कुछ भी करना पड़े। उन्होंने पंजाब यूनिवर्सिटी से मास्टर इन साइकोलॉजी की डिग्री हासिल की। साथ ही बैंक में अधिकारी की नौकरी भी हासिल कर ली।
उनका लक्ष्य था आईएएस अधिकारी बनना। 2011 में अमनीत की मेहनत रंग लाई और वह आईपीएस बन गईं। वर्दी पहनते ही ठान लिया कि वह जहां अपनी ड्यूटी का फर्ज निभाएगी वहीं वह लड़कियों की पीठ थपथपाकर उनको मोटिवेट करेंगी। इस लक्ष्य के साथ जब अमनीत ने फील्ड में ड्यूटी ज्वाइन की तो साथ ही महिला स्कूल और कॉलेजों में जाकर लड़कियों में उत्साह पैदा करने का सफर भी शुरू कर दिया।
जालंधर व आसपास का शायद ही कोई ऐसा शिक्षा संस्थान बचा होगा, जहां के विद्यार्थियों को अमनीत ने उत्साहित नहीं किया। इसके साथ ही अमनीत ने यह भी कार्य शुरू कर दिया कि जिस लड़की को परीक्षा में दिक्कत या घबराहट महसूस होती है तो वह अनाधिकारिक तौर पर उसको टिप्स देंगी। अमनीत के पास कई लड़कियां अपना कैरियर बनाने के लिए टिप्स ले रही हैं।