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Normal Vs Turbo Engine: नेचुरल एस्पिरेटिड और टर्बोचार्ज्ड इंजन में क्या है फर्क, जानें कौन सा इंजन है बेहतर

Thu, 26 Jan 2023 12:00 PM IST
समीर गोयल ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

आज के समय में कई कारों में नेचुरल एस्पिरेटिड इंजन और टर्बोचार्ज्ड इंजन का विकल्प मिलता है। दोनों तरह के इंजन में क्या फर्क है और कौन से इंजन वाली कार को खरीदना बेहतर होगा। आइए जानते हैं।

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For Reference Only - फोटो : सोशल मीडिया

अगर आप भी कारों में दिचलस्पी रखते हैं तो आपको यह बात पता होगी कि कार में इंजन काफी महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। आजकल कारों में कई तरह के इंजन दिए जाते हैं लेकिन मुख्य तौर पर नेचुरल एस्पिरेटिड इंजन और टर्बोचार्ज्ड इंजन मिलते हैं। दोनों तरह के इंजन में क्या फर्क होता है और कौन से इंजन वाली कार आपके लिए बेहतर साबित हो सकती है। हम इसकी जानकारी आपको इस खबर में दे रहे हैं।

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किस तरह के इंजन का चलन ज्यादा

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For Reference Only - फोटो : hyundai india

भारतीय कार बाजार में आमतौर पर कई तरह के वाहनों की बिक्री होती है। इनमें कई तरह के इंजन ऑफर किए जाते हैं। लेकिन सबसे ज्यादा नेचुरल एस्पिरेटिड इंजन की कारों की बिक्री होती है। इसके अलावा टर्बोचार्ज्ड इंजन को भी काफी ज्यादा पसंद किया जाता है।

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पड़ती है इनकी जरूरत

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For Reference Only - फोटो : सोशल मीडिया

नेचुरल एस्पिरेटिड और टर्बोचार्ज्ड इंजन को चलाने के लिए मुख्य तौर पर तीन चीजों की जरूरत पड़ती है। इनमें स्पार्क, फ्यूल और हवा शामिल हैं। यह तीन चीजों के कारण ही इंजन को चलाया जाता है।

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नेचुरल एस्पिरेटिड इंजन

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For Reference Only - फोटो : सोशल मीडिया
इस तरह के इंजन की सबसे ज्यादा बाजार में मौजूद हैं। नेचुरली एस्पिरेटिड इंजन के गैस सिलेंडर में नेचुरल तरीके से हवा को भेजा जाता है। इसमें हवा को किसी भी तरह से फोर्स के जरिए सिलेंडर तक नहीं पहुंचाया जाता। ऐसे इंजन ज्यादातर फोर स्ट्रोक के होते हैं। जिसके जरिए चार चरणों में ऊर्जा बनाई जाती है। पहले स्ट्रोक में पिस्टन नीचे की ओर जाता है और चैंबर में हवा और ईंधन भरता है। दूसरे स्ट्रोक में पिस्टन ऊपर आता है और तीसरे स्ट्रोक में स्पार्क प्लग के जरिए ईंधन और हवा को जलाया जाता है और पावर जनरेट होती है। चौथे और आखिरी चरण में गैस बाहर निकल जाती हैं।

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टर्बोचार्ज्ड इंजन

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For Reference Only - फोटो : tata motors
नेचुरल एस्पिरेटिड इंजन में अगर छोटे टर्बाइन लगाए जाएं तो वह टर्बोचार्ज्ड इंजन की तरह काम करता है। इन छोटे टर्बाइन के जरिए इंजन में जाने वाली हवा के दबाव को बढ़ाया जाता है। यह चैंबर में ज्यादा हवा को रोक सकते हैं जिससे इंजन की शक्ति बढ़ जाती है। हवा का दबाव ज्यादा होने के कारण इंजन ज्यादा ऊर्जा जनरेट करता है। इस तरह के इंजन से बिना वेट बढ़ाए ही ज्यादा पावर जनरेट की जाती है। यह नेचुरल एस्पिरेटिड इंजन की तुलना में ज्यादा आउटपुट देता है।

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मिलती है ज्यादा पावर

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For Reference Only - फोटो : tata motors
नेचुरल एस्पिरेटिड इंजन की तुलना में टर्बोचार्ज्ड इंजन ज्यादा पावर जनरेट करते हैं। किसी छोटे टर्बोचार्ज्ड इंजन से उतनी ही पावर जनरेट की जा सकती है जितनी किसी बड़े नेचुरल एस्पिरेटिड इंजन से होती है। ऐसे में आजकल ज्यादा पावर के कारण टर्बोचार्ज्ड इंजन को पसंद किया जाता है।

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किस इंजन से मिलता है एवरेज

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steam engine car
एवरेज की बात करें तो टर्बोचार्ज्ड इंजन वाली कार सामान्य इंजन की कार के मुकाबले कम ईंधन की खपत करती है, जिससे कार को उतने ही ईंधन में ज्यादा दूरी तक चलाया जा सकता है। साइज में छोट लेकिन ताकतवर होने के कारण टर्बोचार्ज्ड इंजन से ज्यादा एवरेज मिलता है।

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कौन सा इंजन ज्यादा भरोसेमंद

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For Reference Only - फोटो : सोशल मीडिया
नेचुरल एस्पिरेटिड इंजन में इंजन के अलावा अलग से पार्ट्स और तकनीक का उपयोग नहीं किया जाता। लेकिन टर्बोचार्ज्ड इंजन में इंजन के साथ कई अन्य पार्ट्स और तकनीक को जोड़ा जाता है। ऐसे में टर्बोचार्ज्ड इंजन का रखरखाव भी ज्यादा महंगा होता है। इसके अलावा इस तरह के इंजन में अगर किसी पार्ट में खराबी आ जाए तो उसे आसानी से ठीक करवाने में भी परेशानी होती है।

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