जीईएपीपी के उपाध्यक्ष सौरभ कुमार ने रविवार को पीटीआई को बताया, "अध्ययन में हमने पाया कि दोनों ओर 450 मेगावाट के सौर ऊर्जा संयंत्र लगाए जा सकते हैं। हमने राज्य सरकार को अध्ययन पेश किया और उन्होंने इसे मंजूरी दे दी है।" 9 अगस्त को औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी और मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह ने लखनऊ में विभिन्न हितधारकों और सौर ऊर्जा विशेषज्ञों से बात की और उन्हें इस परियोजना के हर पहलू से अवगत कराया।
सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी कुमार ने कहा, "हम अब परियोजना के लिए बोली लगाने में यूपीईआईडीए (उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण) की मदद कर रहे हैं और हमें उम्मीद है कि अगले 15 महीनों में परियोजना चालू होने के लिए तैयार हो जाएगी।" कुमार ने कहा कि यूपीईआईडीए ने जीईएपीपी से राज्य के चार अन्य एक्सप्रेसवे के लिए इसी तरह के अध्ययन करने को कहा है।
उन्होंने कहा कि एक तरह से यह भविष्य के एक्सप्रेसवे के लिए एक मॉडल बन जाएगा। उन्होंने कहा, "हमारे अनुमान के अनुसार, इस परियोजना की लागत लगभग 1,800 करोड़ रुपये होगी और इससे उत्पादित बिजली की दर 4 से 4.50 रुपये प्रति यूनिट होगी। यह ऊर्जा परियोजनाओं के लिए भूमि उपयोग का एक मॉडल भी होगा।"
कुमार ने आगे कहा कि 296 किलोमीटर लंबे बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे के दोनों ओर 15 मीटर जगह पर सौर ऊर्जा संयंत्र लगाए जाएंगे। इससे पूरे एक्सप्रेसवे का विद्युतीकरण हो सकता है। इसके अलावा, हाईवे के किनारे इलेक्ट्रिक चार्जिंग स्टेशन लगाने को भी बढ़ावा दिया जा सकता है, जिससे इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को अपनाने की दिशा में सबसे बड़ी बाधा यानी पर्याप्त चार्जिंग सुविधाओं की कमी को दूर करने में मदद मिलेगी।
उन्होंने कहा कि इस पैमाने पर यह भारत में अपनी तरह की पहली परियोजना है। यह परियोजना आस-पास के गांवों के लिए भी फायदेमंद होगी, क्योंकि उन्हें स्वच्छ ऊर्जा तक पहुंच मिलेगी। इससे एक्सप्रेसवे की खूबसूरती बढ़ने के साथ-साथ रोजगार भी मिलेगा।
उत्तर प्रदेश को अक्षय ऊर्जा का केंद्र बनाने के लिए किन प्रमुख क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करने की जरूरत है, इस बारे में पूछे जाने पर कुमार ने कहा, "बुंदेलखंड जैसे शुष्क क्षेत्रों में अक्षय ऊर्जा की अपार संभावनाएं हैं। लेकिन राज्य में मुख्य चुनौती भूमि की उपलब्धता है क्योंकि इसका एक बड़ा हिस्सा कृषि भूमि है। ऐसे अवसरों की पहचान करने की जरूरत है जहां हम जमीन के छोटे टुकड़ों में अधिकतम लाभ हासिल कर सकें।"
रॉकफेलर और आइकिया फाउंडेशन और बेजोस अर्थ फंड द्वारा स्थापित जीईएपीपी उद्यमियों, सरकारों, प्रौद्योगिकी, नीति और वित्तपोषण भागीदारों का एक गठबंधन है जो विकासशील देशों को उनकी हरित ऊर्जा संक्रमण यात्रा में मदद करने के लिए मिलकर काम कर रहा है।