केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने हाइड्रोजन को भविष्य का ईंधन बताया और कहा कि पंजाब को इस ग्रीन फ्यूल (हरित ईंधन) के उत्पादन का अंतरराष्ट्रीय केंद्र बनाया जाना चाहिए।
गडकरी ने बुधवार को पंजाब के किसानों से पराली न जलाने का भी आग्रह किया। उन्होंने कहा कि फसल के अवशेष का इस्तेमाल इथेनॉल, हाइड्रोजन और कंप्रेस्ड नेचुरल गैस (सीएनजी) के उत्पादन में किया जा सकता है। जिनका बाद में ईंधन के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी पंजाब में 4,000 करोड़ रुपये की लागत वाले 29 राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करने के बाद एक सभा को संबोधित कर रहे थे।
गडकरी ने कहा कि हरित हाइड्रोजन गेहूं के भूसे, धान के भूसे, बगास जैसे फसल अवशेषों से बनाई जा सकती है। और 1 किलो हाइड्रोजन की लागत को 1 अमरीकी डॉलर से कम रखने के प्रयास किए जा रहे हैं।
गडकरी ने कहा, "हाइड्रोजन भविष्य का ईंधन है। हमारा देश ऊर्जा का आयात करता है और आने वाले समय में देश को ऊर्जा निर्यातक बनना चाहिए।"
For Reference Only
- फोटो : सोशल मीडिया
गडकरी ने कहा कि हाल की एक बैठक के दौरान उन्होंने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान से राज्य को हरित हाइड्रोजन उत्पादन का अंतरराष्ट्रीय केंद्र बनाने का आग्रह किया है। क्योंकि राज्य में पराली और बायोमास प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है।
उन्होंने कहा कि हाइड्रोजन का इस्तेमाल रेलवे के इंजन, हवाई जहाज, ट्रक, बस और कार चलाने में किया जा सकता है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि पंजाब के किसानों को 'ऊर्जादाता' (ऊर्जा प्रदाता) बनाया जाना चाहिए।
गडकरी ने किसानों से पराली न जलाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, "हमारे पास एक टेक्नोलॉजी है जिसके द्वारा पराली से बिटुमेन बनाया जा सकता है।" उन्होंने आगे कहा कि हरियाणा में एक परियोजना शुरू की जाएगी जहां एक लाख टन धान की पराली से एक लाख लीटर इथेनॉल और 150 टन बिटुमेन बनाया जाएगा।
उन्होंने यह भी कहा कि कुछ कंपनियां इथेनॉल से चलने वाली बाइक और ऑटो-रिक्शा लेकर आई हैं।
मंत्री ने कहा कि इंडियन ऑयल देश में 300 इथेनॉल पंप भी लगाएगा।
गडकरी ने कहा कि जब 2014 में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बीजेपी सत्ता में आई, तो यह तय किया गया था कि देश के बुनियादी ढांचे को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी देश की प्रगति के लिए अच्छा बुनियादी ढांचा आवश्यक है।