मंत्री प्रह्लाद जोशी ने जताई नाराजगी
केंद्रीय उपभोक्ता मामलों के मंत्री प्रह्लाद जोशी ने गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी दी, "CCPA अब Ola Cabs और Rapido जैसे अन्य ऐप्स की भी जांच कर रही है। अगर ये भी इस तरह की प्रथाओं में शामिल पाए जाते हैं, तो इन्हें भी नोटिस जारी किया जाएगा।”
एडवांस टिप पर मंत्री की सख्त टिप्पणी
बुधवार को ही जोशी ने उबर के 'एडवांस टिप' सिस्टम पर गंभीर चिंता जताई थी। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर उबर के इस फीचर की कड़ी आलोचना करते हुए कहा, "एडवांस टिप की प्रथा चिंताजनक है। किसी उपभोक्ता को तेज सेवा के नाम पर पहले से टिप देने के लिए मजबूर या प्रेरित करना, शोषण और अनुचित व्यापार का उदाहरण है। टिप सेवा के बाद प्रशंसा के तौर पर दी जाती है, कोई हक नहीं होती।"
उन्होंने यह भी कहा कि उपभोक्ताओं के साथ डिजिटली हो रहे लेन-देन में पारदर्शिता, ईमानदारी और जवाबदेही जरूरी है। उन्होंने इस मुद्दे पर CCPA को तुरंत कार्रवाई करने का निर्देश दिया।
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कैसे काम करता है 'एडवांस टिप' फीचर?
जब कोई ग्राहक उबर पर राइड बुक करता है, तो एप एक विकल्प देता है जिसमें 50 रुपये, 75 रुपये या 100 रुपये की एडवांस टिप जोड़ने का सुझाव दिया जाता है, साथ में यह मैसेज आता है - "फास्ट पिकअप के लिए टिप जोड़ें। अगर आप टिप देते हैं तो ड्राइवर के इस राइड को स्वीकार करने की संभावना बढ़ जाती है।"
उबर का कहना है कि यह पूरी टिप सीधे ड्राइवर को जाती है। लेकिन एप ये भी बताता है कि एक बार जो टिप एड कर दी गई, उसे बाद में बदला नहीं जा सकता।
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दूसरे एप्स में भी है ऐसा फीचर
सिर्फ उबर ही नहीं, Rapido (रेपिडो) और Ola (ओला) जैसे एप में भी एडवांस टिप का फीचर मौजूद है। हालांकि ओला में यह स्पष्ट तौर पर नहीं लिखा होता कि टिप देने से राइड जल्दी मिलेगी।
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CCPA ने मांगा जवाब, भ्रम फैलाने का आरोप
अब CCPA ने उबर से इस फीचर पर विस्तृत जवाब मांगा है। संस्था का कहना है कि इस तरह का संदेश ग्राहकों को भ्रमित कर सकता है। जिससे उन्हें ऐसा लगे कि तेज सेवा पाने के लिए एक्स्ट्रा पैसे देने जरूरी हैं। ऐसे व्यवहार से ग्राहकों का भरोसा टूट सकता है।
अब बढ़ सकता है दबाव
अब जब ओला और रैपिडो जैसे बड़े ऐप्स भी CCPA के रडार पर आ गए हैं, तो इन कंपनियों पर दबाव बढ़ना तय है। अगर जांच में ये दोषी पाए जाते हैं, तो इन्हें भी उबर की तरह कानूनी प्रक्रिया का सामना करना पड़ सकता है।
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पहले भी कंपनियों पर उठे सवाल
यह पहली बार नहीं है जब CCPA ने राइड-हेलिंग कंपनियों पर सवाल उठाए हों। जनवरी में उबर और ओला दोनों को नोटिस भेजा गया था, जब रिपोर्ट्स आईं कि आईफोन यूजर्स से एनड्रॉयड यूजर्स की तुलना में एक ही रूट पर ज्यादा किराया वसूला जा रहा है।
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उबर पर बढ़ता दबाव
लगातार जांच और सरकारी दबाव को देखते हुए उबर को अब अपने सेवा मॉडल पर फिर से विचार करना पड़ सकता है। खासकर उन सुविधाओं पर जो ग्राहकों की सहूलियत और शोषण के बीच की रेखा को धुंधला कर देती हैं।
इस पूरे मामले से साफ है कि सरकार अब डिजिटल सेवाओं में ग्राहकों के अधिकारों और पारदर्शिता को लेकर ज्यादा सख्त हो रही है, और ऐसी किसी भी रणनीति को बर्दाश्त नहीं करेगी जो उपभोक्ता को गुमराह या मजबूर करती हो।
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