कार के बेस मॉडल में या फिर टॉप लेवल वेरिएंट में भी सीट बेल्ट का ऑप्शन मिलता है। अगर आगे और पीछे बैठे लोगों ने सीट बेल्ट लगा रखी है तो इससे हादसे के दौरान गंभीर चोट लगने की आशंका बेहद कम हो जाती है। आजकल आने वाली कारों में जब तक यात्री सीट बेल्ट सही ढंग से पहन नहीं लेते, तब तक एक बीप की आवाज बजती रहती है। इस अलार्म की वजह से कई बार बड़े हादसों को टाला जा सकता है। यह अलार्म लोगों की जान बचाने के काम करता है।
ऐसे कई मामले आते हैं, जिसमें हादसे के बाद वाहन चालकों को बीमा कंपनी की तरफ से इश्योरेंस क्लेम नहीं मिलता है। बीमा कंपनियां क्लेम देने से मना कर देती है, क्योंकि गाड़ी चलाते समय कार में बैठे यात्री ने सीट बेल्ट नहीं पहन रखी होती है। ऐसे में सीट बेल्ट जान के साथ इश्योरेंस क्लेम दिलाने में भी मदद करती है।
अगर कार में बैठी सवारियों ने सीट बेल्ट सही तरीके से पहन रखी है तो लोगों को हादसे के दौरान गर्दन और सिर पर चोट नहीं लगती है, क्योंकि सीट बेल्ट सवारी को एक स्थिर पॉजीशन में बांधकर रखती है। यही वजह है कि सीट बेल्ट को हमेशा सही ढंग से पहनना चाहिए, ताकि हादसे के वक्त कम से कम नुकसान हो।
कार में अगर सीट बेल्ट रिमाइंडर फीचर दिया गया है तो यह सवारियों की जान बचाने में अहम भूमिका निभाता है। सीट बेल्ट सही ढंग से पहनने पर आगे और पीछे बैठे यात्री हादसे की स्थिति में कार से बाहर नहीं जाते हैं। कई बार ऐसे मामले सामने आते हैं, जिसमें सवारी ने सीट बेल्ट नहीं पहन रखी थी, इस वजह से यात्री हादसे के दौरान सीट से उछलकर कार से बाहर निकल जाता है। ऐसे में ज्यादा चोट लगती है और कई बार जान भी चली जाती है।
अगर कार में बैठे लोगों ने सही ढंग से सीट बेल्ट पहन रखी है तो सड़क पर तैनात ट्रैफिक पुलिस और सीसीटीवी कैमरे वाहन का चालान नहीं काटते हैं। ऐसे में सीट बेल्ट पहनने से जान के साथ चालान से भी बचा जा सकता है। वहीं, अगर यात्री ने सीट बेल्ट नहीं पहन रखी है तो फिर मोटर वाहन नियमों के मुताबिक, ट्रैफिक पुलिस एक हजार रुपये तक का जुर्माना वसूल सकती है।