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SUV Cars: एसयूवी ने भारतीय ऑटो उद्योग के वैल्यूएशन में 19 प्रतिशत की बढ़ोतरी की, जानें कैसे

Thu, 20 Jun 2024 07:18 PM IST
अमर शर्मा ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

भारत में एसयूवी की बिक्री में बढ़ोतरी दो तरह से हुई है। इस सेगमेंट में मात्रा में 23 प्रतिशत और कीमत में 16 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखी गई है। जो कुल मूल्य में 39 प्रतिशत की उछाल है।
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SUV Car - फोटो : Kia India
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विस्तार
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भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग ने वित्तीय वर्ष 2023-24 में एक महत्वपूर्ण बदलाव देखा। जो खासकर एसयूवी के लिए महंगे वाहनों की मांग में बढ़ोतरी से प्रेरित था। प्राइमस पार्टनर्स की एक रिपोर्ट से पता चलता है कि उद्योग के मूल्य में 19 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। जो 10.22 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। जबकि मात्रा में सिर्फ 10 प्रतिशत का मामूली इजाफा हुआ है।
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भारतीय ऑटो उद्योग की मूल्य बढ़ोतरी एसयूवी सेगमेंट के भीतर एक दिलचस्प ट्रेंड से पैदा हुआ है। इस सेगमेंट में मात्रा में 23 प्रतिशत और कीमत में 16 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखी गई है। जो कुल मूल्य में 39 प्रतिशत की उछाल है।

गहराई से देखने पर इस घटना के पीछे कई कारक हैं। सबसे पहले, बढ़ती इनपुट लागत ने संभावित रूप से पूरे बाजार में कीमतों को बढ़ा दिया है, जिससे एसयूवी भी प्रभावित हुई हैं। दूसरा, सेगमेंट के भीतर ही उपभोक्ता की पसंद में साफ तौर पर प्रीमियम एसयूवी की ओर रुझान देखा गया है।

यह हाइब्रिड और ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन ऑप्शंस की बढ़ती लोकप्रियता से और भी तेज हो जाता है। जो अक्सर उच्च मूल्य वाले वाहनों से जुड़े होते हैं। इसके अलावा, सनरूफ जैसे फीचर्स की मांग बढ़ रही हैं। जो एसयूवी के कथित प्राइस वैल्यू को और बढ़ाती हैं।

आखिर में, एसयूवी सेगमेंट के भीतर नवजात इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) बाजार भी भूमिका निभा रहा है। क्योंकि इन वाहनों की कीमत काफी ज्यादा है। ये कारक मिलकर एक ऐसे एसयूवी बाजार की तस्वीर पेश करते हैं जो न सिर्फ मात्रा में बढ़ रहा है, बल्कि ऊंची कीमतों की भी मांग कर रहा है। जो आखिरकार भारतीय ऑटो उद्योग के समग्र मूल्य वृद्धि को चला रहा है।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, प्राइमस पार्टनर्स के प्रबंध निदेशक अनुराग सिंह वैश्विक मोटर वाहन परिदृश्य में भारत की विशिष्ट स्थिति पर जोर देते हैं। उन्होंने कहा, "भारत कम कीमत वाले उत्पादों को दरकिनार कर फीचर्स से भरपूर, उच्च कीमत वाले वाहनों पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।" यह बदलाव विकसित होती उपभोक्ता पसंद और एक मजबूत भारतीय अर्थव्यवस्था के संयोजन से संचालित है। खासतौर पर, एसयूवी ज्यादातर भारतीय कार खरीदारों के लिए पसंदीदा विकल्प बन गई हैं।

अन्य सेगमेंटों का हाल
यह रुझान यात्री वाहन (पीवी) सेगमेंट के बिल्कुल उलट है। जिसमें 9 प्रतिशत की मात्रा में गिरावट और 4 प्रतिशत की मूल्य गिरावट आई है। यह फिर से उपभोक्ता पसंद में एसयूवी की ओर रुझान का सुझाव देता है। भले ही इसका मतलब थोड़ी सी कीमत बढ़ोतरी हो।

हालांकि, दोपहिया वाहन सेगमेंट एक अलग कहानी कहता है। भारत में दोपहिया वाहनों की मात्रा में 10 प्रतिशत और मूल्य में 13 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखी गई। जिसने इस श्रेणी में अपना दबदबा मजबूत किया है। दोपहिया वाहन उद्योग की मात्रा में 76 प्रतिशत का योगदान करते हैं। लेकिन इसके मूल्य में सिर्फ 18 प्रतिशत का योगदान करते हैं। यह भारतीय बाजार में दोपहिया वाहनों की सामर्थ्य और व्यावहारिकता को दर्शाता है।

आगे की राह
रिपोर्ट वैश्विक ऑटोमोटिव खिलाड़ी के रूप में भारत की मजबूत स्थिति को भी उजागर करता है। हालांकि यह चीन और अमेरिका के बाद वाहन पंजीकरण के मामले में तीसरे स्थान पर है। लेकिन भारत की मूल्य बढ़ोतरी, मात्रा वृद्धि से ज्यादा है, जो उच्च मूल्य वाले वाहनों की ओर बदलाव का संकेत देती है।

दिलचस्प बात यह है कि भारत में एक वाहन की औसत कीमत कई विकसित देशों की तुलना में कम है। इसके अलावा, भारत पिछले साल 20 मिलियन से ज्यादा यूनिट्स के साथ दुनिया का नंबर एक दोपहिया वाहन उत्पादक है।
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भविष्य की ओर देखते हुए, रिपोर्ट भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग के लिए एक सकारात्मक तस्वीर पेश करती है। वित्त वर्ष 24 में मजबूत प्रदर्शन देखा गया। जिसमें महामारी की अवधि से दबी हुई मांग का लाभ उठाया गया और सप्लाई चेन की बाधाओं को कम किया गया। जैसा कि भारत फीचर्स से भरपूर और उच्च-मूल्य वाले वाहनों को प्राथमिकता देना जारी रखता है, उद्योग आगे की बढ़ोतरी और परिवर्तन के लिए तैयार है।
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